नई दिल्ली में मणिपुर के भाजपा विधायकों की एक अहम बैठक उस समय चर्चा में आ गई, जब कुकी और मैतेई समुदाय से जुड़े विधायक मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद पहली बार एक साथ नजर आए। मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के बाद दोनों समुदायों के नेताओं के बीच संवाद लगभग ठप हो गया था और राजनीतिक स्तर पर भी दूरी बनी हुई थी। ऐसे में दिल्ली में हुई यह मुलाकात न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक का उद्देश्य मणिपुर की जमीनी स्थिति की समीक्षा करना और राज्य में शांति व सामान्य स्थिति बहाल करने के उपायों पर विचार करना बताया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में केंद्र सरकार और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी भूमिका निभाई। विधायकों से कहा गया कि वे समुदायगत मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के हित में साझा समाधान तलाशें। चर्चा के दौरान विस्थापित लोगों की समस्याओं, राहत शिविरों की स्थिति, कानून-व्यवस्था और आपसी विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। पार्टी नेतृत्व ने यह संकेत भी दिया कि मणिपुर में स्थायी शांति के लिए राजनीतिक संवाद और सहयोग अनिवार्य है।
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है और राज्य की राजनीतिक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। भाजपा के पास विधानसभा में संख्या बल होने के बावजूद हिंसा के बाद बदले हालात और नेतृत्व को लेकर सहमति न बनने के कारण सरकार गठन पर फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में कुकी और मैतेई विधायकों की एक साथ मौजूदगी को आगे की राजनीतिक प्रक्रिया के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के बाद किसी ठोस निर्णय की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन शामिल विधायकों ने इसे “संवाद की शुरुआत” बताया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तरह की और बैठकें हो सकती हैं, ताकि सभी पक्षों को साथ लेकर मणिपुर में शांति, स्थिरता और विश्वास की बहाली की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। यह मुलाकात इस बात का संकेत मानी जा रही है कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच अब राजनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें फिर से शुरू हो रही हैं।













