कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। ओडिशा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई उस पत्र के बाद हुई, जो मोकिम ने कुछ समय पहले कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लिखा था। इस पत्र में उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। मोकिम की यह पहल अब उन्हीं पर भारी पड़ गई है और पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता तथा पार्टी-विरोधी गतिविधि करार देते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया है।
मोहम्मद मोकिम ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी के भीतर संवाद की कमी लगातार बढ़ रही है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पा रही है। मोकिम का आरोप था कि पार्टी संगठन और नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर चुनावी प्रदर्शन और संगठन की मजबूती पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि विधायक रहते हुए और लंबे समय तक पार्टी से जुड़े रहने के बावजूद उन्हें राहुल गांधी से मुलाकात का अवसर तक नहीं मिल सका, जो पार्टी के अंदर बढ़ते अलगाव का उदाहरण है।
अपने पत्र में मोकिम ने कांग्रेस के हालिया चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा था कि पार्टी को गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है। उन्होंने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव और नेतृत्व में नई ऊर्जा लाने की वकालत की थी। मोकिम ने यह भी संकेत दिया था कि पार्टी को युवाओं को अधिक अवसर देने चाहिए और फैसले लेने की प्रक्रिया में जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था पार्टी को आगे ले जाने में नाकाम साबित हो रही है और यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो कांग्रेस को और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने मोकिम के इन आरोपों और सुझावों को रचनात्मक आलोचना के रूप में स्वीकार करने के बजाय अनुशासनहीनता माना। पार्टी का कहना है कि आंतरिक मुद्दों को इस तरह उठाना और शीर्ष नेतृत्व पर सीधे सवाल खड़े करना संगठनात्मक मर्यादा के खिलाफ है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मोकिम के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी, जिसे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मंजूरी दे दी। इसके बाद आधिकारिक रूप से यह ऐलान किया गया कि मोहम्मद मोकिम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जाता है।
निष्कासन के बाद मोकिम ने अपने बचाव में कहा कि उनका इरादा पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाना था। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी को जो पत्र लिखा, वह कांग्रेस के भविष्य को लेकर चिंता और सुधार की भावना से प्रेरित था। मोकिम का दावा है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं थे, बल्कि पार्टी की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा से लोकतांत्रिक विचारधारा और अभिव्यक्ति की आजादी की बात करती रही है, ऐसे में पार्टी के भीतर सवाल उठाने को गलत नहीं ठहराया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि असहमति जताने का भी एक दायरा और तरीका होता है। उनके मुताबिक, नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की शिकायतें और पत्राचार पार्टी की एकजुटता को कमजोर करते हैं और विपक्ष को कांग्रेस पर हमला करने का मौका देते हैं। पार्टी का कहना है कि संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और कोई भी नेता सार्वजनिक या अर्ध-सार्वजनिक मंच पर नेतृत्व की छवि को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मोहम्मद मोकिम का निष्कासन कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का एक और उदाहरण है। यह मामला यह भी दिखाता है कि पार्टी इस समय असहमति और अनुशासन के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष कर रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या कांग्रेस ऐसे मामलों से सबक लेकर संगठनात्मक सुधार की दिशा में कदम उठाती है या फिर इस तरह के विवाद पार्टी की चुनौतियों को और बढ़ाएंगे।













