‘अगर अमेरिका कर सकता है तो भारत क्यों नहीं?’ वेनेजुएला का उदाहरण देकर ओवैसी ने पीएम मोदी को घेरा

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नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बार फिर तीखा और विवादास्पद बयान दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री का दावा किया गया “56 इंच का सीना” है, तो उन्हें पाकिस्तान जाकर 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड को भारत लाकर दिखाना चाहिए। उनके इस बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

ओवैसी ने अपने भाषण में हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का हवाला देते हुए वेनेजुएला का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश अपने हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दूसरे देश में सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, तो भारत आतंकवाद के खिलाफ उतना ही निर्णायक कदम क्यों नहीं उठा सकता। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि भारत में हर चुनाव के दौरान आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की बातें होती हैं, लेकिन 26/11 जैसे हमलों के दोषियों को अब तक सजा क्यों नहीं दिलाई जा सकी।

AIMIM प्रमुख ने विशेष रूप से 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमला देश के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक था, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि इस हमले के मास्टरमाइंड और उससे जुड़े आतंकी आज भी पाकिस्तान में मौजूद बताए जाते हैं, लेकिन उन्हें भारत लाने या उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में सरकार नाकाम रही है। ओवैसी के अनुसार, यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि न्याय और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा सवाल है।

ओवैसी ने यह भी कहा कि सरकार को आतंकवाद के मुद्दे पर केवल भाषणों और नारों से आगे बढ़कर ठोस रणनीति अपनानी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक आतंकियों और उनके सरपरस्तों के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसे बयान खोखले ही माने जाएंगे। उन्होंने पीड़ित परिवारों के दर्द का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों बाद भी उन्हें न्याय का इंतजार है।

ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने ओवैसी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया बताया है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

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