सरकारी कर्मचारियों को राहत, तमिलनाडु सरकार लाई एश्योर्ड पेंशन स्कीम

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तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए ‘तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम (TAPS)’ का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना और लंबे समय से चले आ रहे पेंशन विवाद का संतुलित समाधान निकालना है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब राज्य में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की मांग को लेकर कर्मचारी संगठनों का दबाव लगातार बढ़ रहा था।

एश्योर्ड पेंशन स्कीम के तहत पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद उनके अंतिम वेतन का लगभग 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलने की गारंटी दी जाएगी। इस योजना में कर्मचारियों को अपने वेतन का एक निश्चित हिस्सा योगदान के रूप में जमा करना होगा, जबकि शेष वित्तीय जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाएगी। सरकार इसके लिए एक विशेष पेंशन फंड का गठन करेगी, जिसमें शुरुआती तौर पर हजारों करोड़ रुपये की राशि डाली जाएगी, ताकि भविष्य में पेंशन भुगतान में किसी तरह की बाधा न आए।

नई योजना में महंगाई भत्ते (DA) को भी पेंशन से जोड़ा गया है, जिससे पेंशनधारकों को बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके। इसके अलावा, पेंशनधारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को फैमिली पेंशन देने का प्रावधान रखा गया है। सेवानिवृत्ति या सेवा के दौरान मृत्यु होने पर ग्रेच्युटी की सीमा भी तय की गई है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिल सके।

दरअसल, देश में पेंशन व्यवस्था को लेकर लंबे समय से OPS और NPS के बीच विवाद चलता आ रहा है। OPS में सरकार पूरी तरह पेंशन की जिम्मेदारी उठाती थी और कर्मचारियों को निश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बाजार आधारित है, जिसमें पेंशन की राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। इसी अनिश्चितता के कारण कई राज्यों में कर्मचारी OPS की बहाली की मांग कर रहे थे।

तमिलनाडु की एश्योर्ड पेंशन स्कीम को OPS और NPS के बीच एक मध्य मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह सीधे तौर पर OPS की वापसी नहीं है, लेकिन इसमें सुनिश्चित पेंशन, महंगाई भत्ता और फैमिली पेंशन जैसे प्रावधान शामिल कर कर्मचारियों की प्रमुख चिंताओं को दूर करने की कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि इस योजना से OPS बनाम NPS का विवाद पूरी तरह खत्म भले न हो, लेकिन यह कर्मचारियों और सरकार के बीच सहमति का एक मजबूत आधार जरूर तैयार कर सकती है।

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