ईरान में जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। देश में बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियाल के लगातार कमजोर होने से जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। कई शहरों में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने तानाशाही के खिलाफ नारे लगाए और कई स्थानों पर हालात हिंसक भी हो गए।
इन विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं। कुछ शहरों में गोलियों की आवाज सुनी गई, जबकि सरकारी कार्रवाई में कई लोग घायल हुए और कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कुछ इलाकों में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं, वहीं इंटरनेट और संचार सेवाओं पर भी आंशिक रोक की खबरें सामने आई हैं।
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है या उन्हें जान से मारने की कोशिश करती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका “लॉक्ड एंड लोडेड” है, यानी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ खुली धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप के बयान पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान ने इसे अपने आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप बताया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और ईरान जानता है कि किसी भी बाहरी आक्रमण या दबाव का जवाब कहां और कैसे देना है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या कोई अन्य देश हस्तक्षेप करता है, तो ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
ईरान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर ट्रंप के बयान की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
वर्तमान हालात में ईरान के कई हिस्सों में तनाव बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव जारी है, वहीं अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाज़ी ने कूटनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर रूप ले सकता है।












