लोकसभा में वेपिंग का आरोप, अनुराग ठाकुर का बड़ा कदम—स्पीकर से जांच की मांग

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संसद के शीतकालीन सत्र में उस समय हलचल मच गई जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाया कि एक तृणमूल कांग्रेस सांसद संसद परिसर में ई-सिगरेट का उपयोग करते हुए देखे गए। ठाकुर ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि देश में ई-सिगरेट पर कई वर्षों से पूरी तरह प्रतिबंध लागू है, ऐसे में संसद जैसे अहम संवैधानिक संस्थान के भीतर या उसके आसपास इसका उपयोग न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम भी है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि यदि कोई नियम तोड़ा गया है तो उसके लिए उचित कार्रवाई हो।

ठाकुर के बयान के बाद सदन में कुछ देर के लिए हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्षी दलों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सदन की मर्यादा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न माना। विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ मीडिया रिपोर्टों ने टीएमसी के वरिष्ठ नेता के संसद भवन परिसर के बाहर सिगरेट या वेपिंग करते देखे जाने का उल्लेख किया। हालांकि टीएमसी पक्ष का कहना है कि परिसर के बाहर धूम्रपान करना नियमों के दायरे में आता है और सांसद पर लगाए जा रहे आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं।

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह विवाद अचानक चर्चा का विषय बन गया है। 2019 में केंद्र सरकार ने ई-सिगरेट के निर्माण, खरीद-फरोख्त, विज्ञापन और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। ऐसे में यदि किसी सांसद द्वारा संसद में या उसके अंदरूनी क्षेत्रों में ऐसे उपकरण का इस्तेमाल किया गया है, तो यह कानूनी और अनुशासनात्मक—दोनों तरह की कार्यवाही को आमंत्रित कर सकता है। स्पीकर ने भी इस बात का संकेत दिया है कि अगर शिकायत में तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित नियमों के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ धूम्रपान से जुड़े नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी का भी प्रतिबिंब है। संसद में हाल के दिनों में कई मुद्दों पर गर्मा-गर्म बहसें हो चुकी हैं और इस घटना ने दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद इस मामले का क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या यह विवाद आगे किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेता है या यहीं शांत हो जाता है।

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