₹8 लाख करोड़ निवेश और हजारों एकड़ भूमि आवंटन—मोहन सरकार ने पेश की दो साल की रिपोर्ट

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने अपने दो वर्ष पूरे होने पर राज्य की विकास यात्रा और निवेश उपलब्धियों का विस्तृत विवरण साझा किया है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2025 को विशेष रूप से ‘उद्योग वर्ष’ घोषित किया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और औद्योगिक ढांचा मजबूत करना है। इन दो वर्षों में सरकार का दावा है कि लगभग ₹8 लाख करोड़ के उद्योग और निवेश प्रस्ताव प्रदेश में आए, जिनमें से कई परियोजनाएँ जमीन पर उतर चुकी हैं और हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। इन उपलब्धियों को सरकार प्रदेश की औद्योगिक नीति, तेजी से मंजूरी प्रक्रिया, आसान भूमि आवंटन प्रणाली और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल का परिणाम बता रही है।

इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर सम्मेलनों, बैठकों और कॉन्क्लेव का आयोजन किया। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, संभागीय इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव और Fed Expo-2025 जैसे कार्यक्रमों ने देश और विदेश के निवेशकों का ध्यान खींचा। इन मंचों के माध्यम से हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए, जबकि कई कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए एकल-खिड़की प्रणाली के तहत त्वरित मंज़ूरी दी गई। सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 5,500 एकड़ से अधिक भूमि विभिन्न औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित की गई, जिससे उत्पादन शुरू होने की प्रक्रिया तेज हुई है।

राज्य में MSME सेक्टर को भी मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी, प्रशिक्षण और बाज़ार लिंक जैसी सुविधाएँ दी गईं, जिसके चलते बड़ी संख्या में MSME इकाइयों ने उत्पादन शुरू किया और स्थानीय स्तर पर रोज़गार में वृद्धि हुई। सरकार का कहना है कि उद्योगों में सक्रियता बढ़ने से प्रदेश के कई ज़िलों में आर्थिक गतिविधियाँ तेज हुई हैं और युवाओं के लिए नए अवसर बने हैं। हालांकि, कई उद्योग अभी प्रस्ताव या निर्माण चरण में हैं, जिनके वास्तविक लाभ आने वाले वर्षों में देखने को मिलेंगे।

मोहन सरकार की उपलब्धियों में बुन्देलखंड क्षेत्र के विकास को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। जल-संकट से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना, सिंचाई योजनाएँ और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कदम उठाए गए हैं। सरकार का मानना है कि जल उपलब्धता बढ़ने से यहां उद्योग, कृषि और पर्यटन सभी क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज होगी।

हालांकि, इन उपलब्धियों को लेकर विपक्ष सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जिन निवेश प्रस्तावों की बात करती है, उनमें से कितने वास्तविक रूप से उद्योग में बदले हैं, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि अधिकांश प्रोजेक्ट निर्धारित समय-सीमा में प्रगति कर रहे हैं और आने वाले महीनों में इनका बड़ा प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा।

दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगले चरण में सरकार निवेश को जमीन पर उतारने, रोजगार सृजन बढ़ाने और औद्योगिक नीतियों को और सुदृढ़ बनाने पर फोकस करेगी। उनकी सरकार का लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश को आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल किया जाए। सरकार के इन दावों और योजनाओं पर अब नज़र रहेगी कि ये प्रदेश के युवाओं, किसानों और उद्यमियों को कितना प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा पाती हैं।

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