फार्मा सप्लाई चेन में गड़बड़ी! ईडी ने कफ-सीरप मामले में तेज की जांच, कई ठिकाने खंगाले

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कफ-सीरप सिंडीकेट पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अवैध कोडिन युक्त सिरप की तस्करी और उससे जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले में एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। शुक्रवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई में लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर के कई ठिकानों पर तलाशी ली गई, जबकि दूसरी टीमें रांची और अहमदाबाद में भी सक्रिय रहीं। ईडी के निशाने पर वे स्थान थे, जिनके बारे में जांच में बार-बार इनपुट मिल रहे थे। माना जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल सिरप सप्लाई नेटवर्क, फर्जी बिलिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था।

ईडी की टीमों ने छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज, बैंक खातों से जुड़े कागजात और कई संदिग्ध फाइलें जब्त की हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट से जुड़े कुछ फार्मा वितरकों, आपूर्तिकर्ताओं और बिचौलियों की भूमिका शुरुआती जांच में संदिग्ध पाई गई थी, जिनसे जुड़े पते और दफ्तर इस अभियान का हिस्सा रहे। बताया जा रहा है कि कफ-सीरप रैकेट का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है, जहां से सिरप की अवैध बिक्री और परिवहन के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन होने की आशंका है।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे सिस्टम के माध्यम से बड़े पैमाने पर मनी-लॉन्ड्रिंग की गई, जिसके चलते ईडी ने मामले में प्रवर्तन मामलों की सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी। पिछले कुछ महीनों में विभिन्न जिलों की पुलिस ने लाखों की संख्या में कोडिन युक्त सिरप जब्त किया था, जिसके बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप ले लिया। यही कारण है कि अब ईडी ने नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए वित्तीय पहलुओं को भी खंगालना शुरू कर दिया है। एजेंसी जल्द ही जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर सप्लाई चेन, धन के स्रोत और रैकेट के वास्तविक ऑपरेटरों की पहचान करेगी।

ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल अवैध सिरप की सप्लाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन कंपनियों और व्यक्तियों तक पहुंचने का उद्देश्य भी रखता है जो सिस्टम का दुरुपयोग कर नियमन को दरकिनार करते हुए अवैध कमाई में जुटे हुए थे। जांच पूरी होने के बाद गिरफ्तारी या संपत्ति जब्ती जैसी अगली कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल ईडी की टीमों की रिपोर्ट केंद्र मुख्यालय को भेजी जा रही है और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय होगी।

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