उत्तर प्रदेश में प्रदूषित हवा को स्वच्छ बनाने और वायु गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाने के लिए विश्व बैंक ने एक बड़ी वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दी है। संस्था ने Uttar Pradesh Clean Air Management Program (UPCAMP) के लिए लगभग ₹2,700 करोड़ (लगभग 299 मिलियन डॉलर) की फंडिंग स्वीकृत की है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में फैले वायु प्रदूषकों को कम करना, सतत विकास को बढ़ावा देना और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को घटाना है। राज्य सरकार और विश्व बैंक के बीच यह साझेदारी वायु गुणवत्ता सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे प्रयासों का भी हिस्सा है।
परियोजना के अंतर्गत प्रदूषण के प्रमुख स्रोत—जैसे परिवहन, उद्योग, घरेलू ईंधन उपयोग, कृषि अवशेष जलाना और ठोस कचरा प्रबंधन—को लक्ष्य कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। राज्य सरकार स्वच्छ घरेलू ऊर्जा उपलब्ध कराने पर भी विशेष ज़ोर दे रही है। इसके लिए लगभग 39 लाख घरों में क्लीन कुकिंग समाधान पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे घरेलू प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। वहीं शहरी वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के तहत लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे बड़े शहरों में 15,000 इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा और 500 इलेक्ट्रिक बसें तैनात की जाएँगी। इसके साथ ही राज्य में 13,500 पुराने, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध रूप से कम-उत्सर्जन वाले वाहनों से बदलने की योजना भी शामिल है।
विश्व बैंक ने इस परियोजना में “एयरशेड-आधारित दृष्टिकोण” अपनाने पर ज़ोर दिया है। यह पद्धति वायु को एक सीमाहीन संसाधन मानकर उसका समग्र प्रबंधन करती है, जिससे पड़ोसी क्षेत्रों और राज्यों से आने वाले प्रदूषकों को भी नियंत्रित किया जा सके। यह मॉडल पारंपरिक शहर-स्तरीय योजनाओं की तुलना में अधिक प्रभावी माना जा रहा है। परियोजना के संचालन के लिए एक विशेष संस्थागत ढाँचा भी तैयार किया गया है, जो निगरानी, समन्वय और तकनीकी प्रक्रियाओं को मजबूती देगा। इसके अंतर्गत वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार, उद्योगों में स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और छोटे उद्योगों में उत्सर्जन कम करने के प्रयास शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े निवेश से न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि हरित नौकरियों और पर्यावरण-अनुकूल व्यावसायिक अवसरों में भी वृद्धि होगी। ई-बसों और ई-रिक्शों जैसी सेवाओं के विस्तार से परिवहन क्षेत्र में रोजगार बढ़ने की संभावना है। परियोजना का असर उत्तर प्रदेश के साथ उन करोड़ों लोगों पर भी पड़ेगा जो इसके प्रभाव क्षेत्र में रहते हैं। प्रदेश में कई शहर लंबे समय से PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों के उच्च स्तर का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह वित्तीय सहायता राज्य सरकार के प्रयासों को तेज़ करेगी और वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को नई दिशा देगी।
कुल मिलाकर, यह साझेदारी सिर्फ एक वित्तीय निवेश नहीं, बल्कि वायु गुणवत्ता सुधार, पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की एक बड़ी रणनीतिक पहल है। उम्मीद की जा रही है कि यह कदम आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को स्वच्छ और स्वस्थ हवा की दिशा में महत्वपूर्ण और स्थायी लाभ प्रदान करेगा।













