भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बड़ा कदम, आज होगी उच्चस्तरीय बातचीत

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को गति देने के लिए आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय आयोग की ट्रेड डायरेक्टर-जनरल साबिन वेयेंड आमने-सामने बैठकर उन जटिल मुद्दों की समीक्षा करेंगे, जिनकी वजह से समझौते पर अंतिम सहमति अभी तक नहीं बन पाई है। दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा चरण बातचीत के निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है, क्योंकि कई महीनों से चली आ रहीं तकनीकी चर्चाओं के बाद अब कुछ अहम राजनीतिक व व्यापारिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार आज की वार्ता मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी—ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र में टैरिफ व बाजार पहुंच, स्टील और धातुओं से जुड़े नियम, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) यानी EU के पर्यावरणीय कर ढांचे का प्रभाव, और सेवाओं व नियामकीय ढांचों में समन्वय। भारत ने लगातार यह बात उठाई है कि समझौता ऐसा होना चाहिए जो घरेलू विनिर्माण को नुकसान न पहुँचाए, वहीं EU चाहता है कि भारतीय बाजार में अपने औद्योगिक उत्पादों को अधिक सुगम पहुँच मिले। इस अंतर को कम करने के लिए पिछले महीनों में कई दौर की तकनीकी बातचीत की गई है, और अब उम्मीद है कि मंत्री-स्तरीय मुलाकात से दिशा साफ़ हो सकती है।

इस वार्ता पर उद्योग जगत की भी नज़र टिकी हुई है। खासतौर पर वैश्विक ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपनियाँ FTA के नियमों की स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि उनकी निवेश योजनाएँ और भारत की EV नीति में भागीदारी इसी पर निर्भर करती है। कई कंपनियों ने संकेत दिया है कि टैक्स और बाजार पहुंच नियमों में बदलाव सीधे उनकी भारत नीति को प्रभावित करेंगे। यही कारण है कि FTA का दायरा सिर्फ आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, तकनीकी सहयोग और सप्लाई-चेन के भविष्य को भी आकार देगा।

वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि भारत और EU, दोनों ही एक ‘संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते’ को अंतिम रूप देने की इच्छा रखते हैं। पिछले महीनों में कई विषयों पर प्रगति हुई है, जैसे डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा और छोटे व्यापारों के समर्थन से जुड़े मसले, लेकिन कुछ संवेदनशील क्षेत्रों—विशेषकर पर्यावरणीय कराधान और औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क—पर अभी भी अंतिम निर्णय बाकी है। इसी कारण से आज की बैठक को FTA के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो दोनों पक्षों का लक्ष्य इसे वर्ष के अंत तक अंतिम मसौदे के चरण में ले जाना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि EU की पर्यावरण नीतियों, भारत की घरेलू संरक्षण आवश्यकताओं और दोनों पक्षों के औद्योगिक हितों में संतुलन बनाने में अभी समय लग सकता है। फिर भी, इस बैठक से उम्मीद बढ़ी है कि भारत और EU के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई मजबूती मिल सकती है, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश प्रवाह को नए आयाम देगी।

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