भारत पहली बार यूनेस्को की ‘इंटरगवर्नमेंटल कमेटी फॉर द सेफगार्डिंग ऑफ द इंटैन्ज़िबल कल्चरल हेरिटेज’ के 20वें सत्र की मेज़बानी करने जा रहा है। यह वैश्विक आयोजन 8 से 13 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में होगा। यूनेस्को की आधिकारिक स्वीकृति के बाद भारत ने इस सत्र की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। यह सम्मेलन सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय नीतियों, नामांकन प्रक्रियाओं, संरक्षण उपायों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच सहयोग पर केंद्रित रहेगा। दुनिया भर से संस्कृति विशेषज्ञ, सरकारी प्रतिनिधि, समुदायों के सदस्य और नीति-निर्माता इस सत्र में भाग लेंगे। भारत की ओर से स्थायी प्रतिनिधि हेमसंरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सत्र का नेतृत्व करेंगे और चर्चा में भाग लेंगे।
लाल किले में होने वाला यह आयोजन इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि स्वयं यह स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक गतिविधियों की मेज़बानी से भारत की विरासत-समृद्ध पहचान और सांस्कृतिक नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। सम्मेलन के दौरान प्रबंधन, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) ने किले को 5 दिसंबर से 14 दिसंबर 2025 तक आम दर्शकों के लिए बंद रखने का फैसला किया है। इस अवधि में स्थल के अंदर केवल आधिकारिक कार्यक्रम और प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही की अनुमति होगी, जिससे सुरक्षा और संरचना-संरक्षण के मानकों को बनाए रखने में आसानी होगी। लाल किले के हालिया संरक्षण संबंधी मुद्दों — जैसे प्रदूषण के प्रभाव और पत्थर की सतह को होने वाले नुकसान — को देखते हुए भी इस आयोजन के दौरान संरक्षित क्षेत्र के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यूनेस्को का यह सत्र भारत के लिए एक बड़े सांस्कृतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यहाँ सांस्कृतिक परंपराओं, लोक-कलाओं, शिल्प-कौशल और समुदायों की जीवित विरासत पर गहन चर्चा होगी। भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान और उसकी संरक्षण नीति वैश्विक मंच पर प्रमुखता से सामने आएगी। इस सम्मेलन के उद्घाटन को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि अक्सर ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शीर्ष नेतृत्व की सहभागिता देखी जाती है और उम्मीद जताई जा रही है कि कार्यक्रम का उद्घाटन उच्चस्तरीय प्रतिनिधि द्वारा किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति, पर्यटन, विरासत संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला होने जा रहा है।













