अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) जनवरी 2026 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर दो बड़े और बेहद अहम स्पेसवॉक करने जा रही है। इन स्पेसवॉक का उद्देश्य स्टेशन की बिजली प्रणाली को मजबूत करना, नेविगेशन और कैमरा सिस्टम को अपग्रेड करना तथा भविष्य के मिशनों के लिए ISS को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाना है। नासा का यह पूरा कार्यक्रम Expedition-74 मिशन का हिस्सा है और इसे ISS के दीर्घकालिक संचालन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नासा के अनुसार पहला स्पेसवॉक 8 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री ISS के बाहर निकलकर 2A पावर चैनल से जुड़े कार्य पूरे करेंगे। इसका मुख्य लक्ष्य भविष्य में लगाए जाने वाले iROSA (ISS Roll-Out Solar Arrays) के लिए स्टेशन को तैयार करना है। ये नए सोलर पैनल ISS की बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाएंगे, जिससे वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ-साथ स्टेशन की दीर्घकालिक स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। इस स्पेसवॉक में अनुभवी अंतरिक्ष यात्री माइक फिंक और पहली बार स्पेसवॉक करने जा रही जेना कार्डमैन शामिल होंगी। माइक फिंक के लिए यह उनका दसवां स्पेसवॉक होगा, जिससे वे नासा के सबसे अधिक स्पेसवॉक करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में एक और उपलब्धि जोड़ सकते हैं।
दूसरा स्पेसवॉक 15 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें ISS के बाहरी ढांचे पर कई तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इस स्पेसवॉक के दौरान स्टेशन के कैमरा पोर्ट-3 पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे को बदला जाएगा, ताकि पृथ्वी और अंतरिक्ष गतिविधियों की निगरानी और अधिक स्पष्ट रूप से की जा सके। इसके अलावा हार्मनी मॉड्यूल पर नई नेविगेशन सहायता प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे आने-जाने वाले अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग प्रक्रिया और सुरक्षित हो सके। साथ ही स्टेशन के S6 और S4 ट्रस के बीच अमोनिया फ्लूइड जम्पर को स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे तापमान नियंत्रण प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके।
नासा का कहना है कि ये दोनों स्पेसवॉक केवल रख-रखाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ISS के भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा हैं। बढ़ी हुई बिजली क्षमता से स्टेशन पर अधिक उन्नत वैज्ञानिक प्रयोग संभव होंगे, जबकि कैमरा और नेविगेशन सिस्टम के अपग्रेड से अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के मिशन और सुरक्षित बनेंगे। इसके साथ ही फ्लूइड सिस्टम में सुधार से स्टेशन की थर्मल और रेडिएशन सुरक्षा भी मजबूत होगी।
इन स्पेसवॉक से पहले नासा 6 जनवरी 2026 को ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर से एक मीडिया ब्रीफिंग भी आयोजित करेगा, जिसमें पूरे मिशन की विस्तृत जानकारी, लाइव कवरेज और विशेषज्ञों की राय साझा की जाएगी। कुल मिलाकर, जनवरी 2026 में होने वाले ये दोनों स्पेसवॉक नासा के उस ‘मेगा प्लान’ का हिस्सा हैं, जिसके जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को आने वाले वर्षों के लिए अधिक सक्षम, सुरक्षित और ऊर्जा-सम्पन्न बनाया जा रहा है।













