समुद्री प्रदूषण से लड़ने की भारत की ताकत बढ़ी, आईसीजी में शामिल हुआ ‘समुद्र प्रताप’

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भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने अपने बेड़े में ‘समुद्र प्रताप’ नाम के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत को शामिल कर लिया है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) द्वारा डिजाइन और निर्मित यह अत्याधुनिक पोत समुद्री प्रदूषण, विशेषकर तेल रिसाव और रासायनिक हादसों से निपटने की भारत की क्षमता को मजबूत करता है। ‘समुद्र प्रताप’ का शामिल होना न केवल तटरक्षक बल की परिचालन शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि समुद्री पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

‘समुद्र प्रताप’ आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रणालियों से लैस है। इसमें तेल और रसायन की पहचान करने वाले अत्याधुनिक सेंसर, ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो-स्टेबलाइज्ड केमिकल डिटेक्टर और हाई-कैपेसिटी फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, पोत में डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम मौजूद है, जिससे यह समुद्र में एक ही स्थान पर स्थिर रहकर प्रदूषण नियंत्रण कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकता है। फ्लश-टाइप साइड स्वीपिंग आर्म्स और रिट्रैक्टेबल स्टर्न थ्रस्टर जैसी सुविधाएँ इसे त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती हैं।

सुरक्षा के लिहाज से भी ‘समुद्र प्रताप’ को मजबूत बनाया गया है। इस पर 30 मिमी की मुख्य तोप और दो 12.7 मिमी की रिमोट कंट्रोल गन लगाई गई हैं, जो आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी हैं। इससे यह पोत न केवल प्रदूषण नियंत्रण, बल्कि समुद्री कानून प्रवर्तन, निगरानी और आपात स्थितियों में भी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

डिजाइन और संरचना की बात करें तो ‘समुद्र प्रताप’ लगभग 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा है, जबकि इसका विस्थापन करीब 4,170 टन है। यह पोत लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रहकर काम कर सकता है और बड़े स्तर पर तेल रिसाव या समुद्री प्रदूषण की घटनाओं से निपटने में सक्षम है। इसके साथ ही, यह खोज एवं बचाव अभियानों और भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा में भी उपयोगी साबित होगा।

‘समुद्र प्रताप’ आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल का सशक्त उदाहरण है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और प्रणालियों का उपयोग किया गया है, जिससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। यह पोत भारतीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती देता है और आने वाले समय में समुद्री प्रदूषण से निपटने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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