बांग्लादेश में उबाल: शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत, ढाका में हिंसक प्रदर्शन

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बांग्लादेश इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के कट्टर आलोचक और प्रभावशाली युवा नेता शरिफ उस्मान हादी की मौत के बाद राजधानी ढाका सहित देश के कई हिस्सों में हालात बेकाबू हो गए हैं। उनकी मौत की खबर सामने आते ही बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो धीरे-धीरे हिंसक रूप में बदलते चले गए। कई इलाकों में आगजनी, तोड़फोड़ और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं।

शरिफ उस्मान हादी बांग्लादेश की राजनीति में उभरते हुए छात्र और युवा नेता थे। वे शेख हसीना सरकार की नीतियों के मुखर विरोधी माने जाते थे और ‘इंकिलाब मंच’ नामक संगठन से जुड़े थे। हादी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे और लगातार लोकतंत्र, मानवाधिकार और सरकारी दमन के मुद्दों को उठाते रहे थे। 12 दिसंबर को ढाका में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने जाते समय उन पर गोलीबारी की गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उनकी मौत हो गई।

हादी की मौत की पुष्टि होते ही ढाका के शाहबाग, विश्वविद्यालय क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर हत्या का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए। हालात तब और बिगड़ गए जब कुछ उग्र समूहों ने सरकारी संपत्तियों, राजनीतिक कार्यालयों और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। कई जगहों पर वाहनों में आग लगा दी गई और प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया गया, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।

प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका में कई अखबारों और मीडिया कार्यालयों पर हमले की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ स्थानों पर सत्तारूढ़ अवामी लीग से जुड़े दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया। आगजनी और तोड़फोड़ के कारण शहर के कई इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने और सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी बढ़ाने के कदम उठाने पड़े।

स्थिति को काबू में करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने राजधानी और संवेदनशील इलाकों में सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार गश्त कर रही हैं और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उस्मान हादी की मौत की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और कानून के दायरे में रहकर ही न्याय संभव है। वहीं विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाजों को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ता दिख रहा है। आगामी राष्ट्रीय चुनावों से पहले यह संकट सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। फिलहाल ढाका और अन्य शहरों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।

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