लोकसभा में VB-G RAM G बिल पर हंगामा, मनरेगा की जगह नए कानून को लेकर तीखी तकरार

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लोकसभा में ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Aajeevika Mission–Gramin) बिल को लेकर बुधवार को जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। करीब 14 घंटे तक चली लंबी बहस में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। सरकार का कहना है कि यह विधेयक ग्रामीण भारत में रोजगार, कौशल और आय के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से लाया गया है, जबकि विपक्ष इसे मनरेगा की आत्मा को कमजोर करने वाला कदम बता रहा है।

सरकार की ओर से ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सदन को बताया कि VB-G RAM G बिल का मकसद पुराने ढांचे में सुधार कर रोजगार योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना है। प्रस्तावित कानून में रोजगार के दिनों, कौशल विकास, परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण आजीविका मिशनों को एकीकृत करने पर जोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह पहल ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है और इससे गांवों में स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

हालांकि विपक्ष ने बिल के नाम परिवर्तन को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया। विपक्षी दलों का कहना है कि मनरेगा जैसे स्थापित कानून का नाम बदलना केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि वैचारिक फैसला है। उनका आरोप है कि महात्मा गांधी के नाम को हटाना सरकार की राजनीतिक सोच को दर्शाता है और इससे करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों से जुड़े एक ऐतिहासिक अधिकार को कमजोर किया जा रहा है।

वित्तीय प्रावधानों और फंडिंग को लेकर भी विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी सांसदों ने आशंका जताई कि नए बिल में बजट की स्पष्ट गारंटी, मजदूरी भुगतान और कानूनी अधिकारों को कमजोर किया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि मनरेगा जैसे अधिकार आधारित कानून की जगह एक मिशन मॉडल लाया गया, तो इससे मजदूरों की सुरक्षा और जवाबदेही कम हो सकती है।

संसद के भीतर हुई तीखी बहस के दौरान कई बार हंगामे की स्थिति बनी। विपक्ष ने मांग की कि इस विधेयक को तुरंत पारित करने के बजाय संसदीय स्थायी समिति को भेजा जाए, ताकि इसके हर प्रावधान की विस्तार से समीक्षा हो सके। वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बिल किसी योजना को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए लाया गया है।

कुल मिलाकर VB-G RAM G बिल ने संसद में एक बड़े राजनीतिक विमर्श को जन्म दिया है। एक तरफ सरकार इसे ग्रामीण भारत के भविष्य से जोड़कर देख रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सामाजिक सुरक्षा और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा मुद्दा मान रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस बिल में संशोधन करती है या विपक्ष की मांग के अनुसार इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाता है।

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