भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में उस समय तनाव देखने को मिला, जब ढाका ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया। इस कदम के बाद नई दिल्ली की ओर से सख्त लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया सामने आई। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पारस्परिक सम्मान, संप्रभुता और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांत पर आगे बढ़ने चाहिए। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों का समर्थक रहा है।
बांग्लादेश की ओर से भारतीय उच्चायुक्त को बुलाए जाने की पृष्ठभूमि में कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों को लेकर असहमति बताई जा रही है। ढाका का कहना है कि भारत में रह रहे कुछ व्यक्तियों के बयान और गतिविधियां बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसी संदर्भ में बांग्लादेश ने अपनी आपत्तियां औपचारिक रूप से दर्ज कराईं और भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील मुद्दों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
भारत ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि वह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करता और न ही अपनी धरती का इस्तेमाल किसी पड़ोसी देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए होने देता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, स्थिरता और शांति में विश्वास करता है और बांग्लादेश में निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण माहौल का समर्थन करता रहेगा। साथ ही, भारत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष संयम बरतेंगे और संवाद के जरिए मतभेदों का समाधान करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से गहरे रहे हैं, ऐसे में किसी भी तरह का कूटनीतिक टकराव दोनों देशों के हित में नहीं है। सीमा प्रबंधन, व्यापार, संपर्क परियोजनाएं और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर दोनों देशों का सहयोग जारी रहना जरूरी है। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह बांग्लादेश के साथ रिश्तों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है, बशर्ते आपसी सम्मान और भरोसे की भावना बनी रहे। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की जा सकती है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों पर इसका दीर्घकालिक नकारात्मक असर न पड़े।













