लोकतंत्र पर बहस: संसद में अमित शाह के बयान को लेकर कांग्रेस का विरोध

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नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक बयान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। सदन में बोलते हुए अमित शाह ने लोकतंत्र, संसदीय परंपराओं और विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी की, जिसे कांग्रेस ने अपमानजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई और आरोप लगाया कि सरकार संसद को गंभीर विमर्श का मंच बनाने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी का अखाड़ा बना रही है। इसी संदर्भ में कांग्रेस की ओर से कहा गया कि लोकतंत्र को “तमाशा” बना दिया गया है और असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।

अमित शाह की टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सबसे कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सदन में खड़े होकर कहा कि गृहमंत्री का बयान न केवल विपक्ष का अपमान है, बल्कि यह संसदीय मर्यादाओं के भी खिलाफ है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार सवालों से बचने के लिए मुद्दों को भटकाने और विपक्ष पर अनावश्यक आरोप लगाने की रणनीति अपना रही है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन उसे बार-बार बाधित करना और जवाब देने से बचना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहां गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कटाक्ष और आरोप-प्रत्यारोप। पार्टी का आरोप है कि सरकार बहुमत के दम पर विपक्ष की आवाज़ को दबा रही है और सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर रही है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि विपक्ष बेवजह हंगामा कर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है। इस टकराव ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है।

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