नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में गृहिणियों (होममेकर्स) के असीम योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें ‘देश निर्माता’ (Nation Builders) करार दिया है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में घरेलू देखभाल सेवाओं के नुकसान को अलग हेड ऑफ कंपेंसेशन के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया और इसका नॉशनल मासिक मूल्य कम से कम ₹30,000 तय किया है।
फैसले के प्रमुख बिंदु…
बेंच: जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच।
मामला: 2001 में पंजाब में एक दुर्घटना में गृहिणी रेशमा की मौत के मामले में परिवार द्वारा मुआवजे की मांग। मामले में 25 साल से ज्यादा समय लग गया।
कोर्ट का आदेश…
“होममेकर देश बनाती हैं। वे परिवार और समाज के लिए अपरिहार्य हैं। उनका योगदान अक्सर अनदेखा रह जाता है, लेकिन यह आर्थिक मूल्य से भरपूर है।”
घरेलू सेवाओं के नुकसान को ‘लॉस ऑफ डोमेस्टिक केयर’ के रूप में अलग से मुआवजा दिया जाएगा।
पुरानी गाइडलाइंस को अपडेट करते हुए न्यूनतम ₹30,000 प्रति माह का मूल्य तय किया गया।
यह फैसला मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजे के मामलों में क्रांतिकारी साबित होगा और महिलाओं के आर्थिक योगदान को मजबूती देगा।
फैसले का महत्व…
गृहिणियों के काम को आर्थिक रूप से मान्यता मिली।
भविष्य के सभी मुआवजा मामलों में इस गाइडलाइन का पालन होगा।
कोर्ट ने जल्दी निपटान की भी अपील की ताकि परिवारों को अनावश्यक देरी न हो।
यह निर्णय लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो घरेलू काम की अनदेखी को चुनौती देता है।











