नई दिल्ली, 10 जून 2026: विश्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 की शुरुआत (जनवरी-मार्च) में 8% से अधिक की मजबूत वृद्धि दर्ज कर चुकी है। वैश्विक अनिश्चितताओं और FII की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के निरंतर खरीदारी से बाजार और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी हुई है।
वृद्धि का अनुमान: विश्व बैंक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, क्रेडिट ग्रोथ में तेजी और बजटीय समर्थन के कारण फरवरी-मार्च 2026 तक अर्थव्यवस्था 8%+ की रफ्तार से बढ़ रही थी। तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत की मजबूत बुनियादी ढांचा और रिफाइनिंग क्षमता ने झटके को कम किया।
FII vs DII: हाल के दिनों में FII ने भारी बिकवाली की (उदाहरण: 8 जून को ₹5,556 करोड़ की नेट सेलिंग), जबकि DII ने लगातार खरीदारी जारी रखी (उसी दिन ₹5,165 करोड़ की नेट खरीदारी)। साल 2026 में FII की कुल बिकवाली ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन DII का सपोर्ट बाजार को संभाल रहा है।
भविष्य का आउटलुक: FY27 (2026-27) के लिए विश्व बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ 6.6% पर रखा है, जो मिडिल ईस्ट संघर्ष, ऊर्जा कीमतों और ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत है। भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
मुख्य ड्राइवर्स: मजबूत निजी खपत, कृषि और सेवा क्षेत्र की अच्छी परफॉर्मेंस, GST सुधार, ग्रामीण आय में वृद्धि और सरकारी पूंजीगत व्यय।
यह खबर भारत की आर्थिक लचीलापन को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कारक वैश्विक दबावों से निपटने में सक्षम साबित हो रहे हैं।













