इस साल (क्रॉप वर्ष 2024–25) भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 8% अधिक है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि को किसानों की मेहनत और सरकार की नीतिगत समर्थन का परिणाम बताया। उन्होंने यह भी बताया कि 2014-15 की तुलना में कुल उत्पादन में लगभग 41.94% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
फसलवार आंकड़ों की बात करें तो धान और गेहूँ का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। इसके अलावा मूंग, सोयाबीन और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों में भी अच्छी पैदावार हुई, जिससे दालों और तेलबीयों की उपलब्धता में सुधार देखने को मिला। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़त के पीछे अनुकूल मौसम, आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर बीज और पोषण प्रबंधन, साथ ही किसानों को मिलने वाली MSP और खरीद नीतियों का अहम योगदान है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। कुछ राज्यों में गोदामों में अनाज की बरबादी की खबरें आई हैं, जिससे कटाई के बाद के हिस्सों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने कहा है कि इस रिकॉर्ड उत्पादन से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य भंडार और निर्यात नीति को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कृषि मंत्री ने भविष्य में उत्पादन को और स्थायी बनाने, भंडारण क्षमता बढ़ाने और मूल्य श्रृंखला में सुधार के लिए कदम उठाने का आश्वासन भी दिया।
इस तरह, भारत ने 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाया है, जो किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों का परिणाम है, लेकिन भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।













