खरगे का सरकार पर निशाना: “नेहरू और कांग्रेस नेताओं को बदनाम करना भाजपा की आदत”

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

संसद के हालिया सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के योगदान को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि “सत्ता पक्ष के शीर्ष नेता बार-बार इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को राजनीतिक चश्मे से देखने का प्रयास कर रहे हैं,” जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है।

खरगे की यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब हाल ही में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने ‘वंदे मातरम’ से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष किए थे। प्रधानमंत्री ने कुछ ऐतिहासिक निर्णयों को भारत के विभाजन से जोड़ते हुए नेहरू-काल की नीतियों पर सवाल उठाए, जबकि अमित शाह ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम के सम्मान’ से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इन बयानों ने विपक्ष में तीखी नाराज़गी पैदा कर दी और पूरे सदन का माहौल गर्म हो गया।

बहस के दौरान खरगे ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम के नारे लगाते हुए जेलों में दिन बिताए, जबकि उस दौर में कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की भूमिका स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि “जो आज राष्ट्रवाद की परिभाषा बताते हैं, वे उस समय अंग्रेज़ों के साथ खड़े दिखे थे।” खरगे ने प्रधानमंत्री के हाल के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता आंदोलन के दिग्गज नेताओं की निरंतर अवमानना देश की राजनीतिक गरिमा को ठेस पहुंचाती है।

संसद में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस हुई और कुछ क्षणों में स्थिति इतनी गरमाई कि सदन को व्यवधान झेलना पड़ा। विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और इतिहास से जुड़े संवेदनशील विषयों का चुनावी लाभ के लिए उपयोग करना “राजनीतिक दुर्भावना” है, जबकि सरकार का दावा है कि वह केवल राष्ट्रहित और ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने की बात कर रही है।

पूरे मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है, क्योंकि इतिहास और राष्ट्रवाद से जुड़ी यह बहस चुनावी संदेशों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है, जबकि सरकार अपने रुख पर अडिग दिखाई देती है। वहीं सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर इस विवाद के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ लगातार जारी हैं, जिससे यह बहस संसद से बाहर भी गहराती जा रही है।

Leave a Comment

और पढ़ें