ओडिशा के मलकानगिरी जिले में आदिवासी और अन्य स्थानीय समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई। रविवार को एक 51 वर्षीय आदिवासी महिला का सिरकाट शव नदी किनारे मिलने के बाद गुस्साए आदिवासियों ने कार्रवाई करते हुए Rakhelguda और आस-पास के गांवों से हथियार उठाकर MV-26 गांव की ओर कूच किया, जहाँ बांग्लादेशी मूल के निवासियों का एक समुदाय रहता है। भीड़ ने वहां कई घरों में आग लगा दी, दुकानों को नष्ट किया और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। कम से कम एक दर्जन से ज़्यादा घरों को क्षति हुई, जिनमें चार घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अफवाहों और लंबे समय से चल रहे सामाजिक व पारिस्थितिक तनाव ने हिंसा को और भड़का दिया।
इस घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 24 घंटे के लिए पूरे मलकानगिरी जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी। इसके साथ ही, Rakhelguda और MV-26 गांव में जुर्म-रोक आदेश लागू किए गए और भारी पुलिस बल के साथ फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन टीम को तैनात किया गया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और अफवाहों के प्रसार को रोकने की अपील की, जबकि आरोपी व्यक्तियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हिंसा की जड़ उस महिला की हत्या है, लेकिन यह केवल एक घटना नहीं बल्कि वर्षों से चल रहे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय तनाव का परिणाम भी है। आदिवासी समुदाय का आरोप है कि जंगल कटान और विकास परियोजनाओं के कारण उनकी पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित हुई और तनाव बढ़ा है। इसके अलावा, स्थानीय बस्तियों में बांग्लादेशी मूल के निवासियों के बसने से पहले से अविश्वास था, जो इस हिंसा की एक प्रमुख वजह बन गया।
अभी भी इलाके में प्रशासन ने सुरक्षा बलों को तैनात रखा है और स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। वहीं, प्रभावित बस्तियों में रहने वाले लोग डर और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं और उन्होंने सरकार और प्रशासन से तत्काल राहत, मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही शांति बहाल करने और प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए सभी प्रयास जारी रहेंगे।













