कर संग्रह कमजोर, कर्ज-सेवा मजबूत: बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार

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बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर कर्ज का दबाव तेजी से बढ़ रहा है और अब देश के राजस्व प्रमुख ने इसे गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) के चेयरमैन ने हाल ही में कहा कि बांग्लादेश लगातार बढ़ती उधारी और कमजोर राजस्व-संग्रह के कारण एक कर्ज-जाल की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार का कर-to-GDP अनुपात वर्षों से कम होता जा रहा है, जबकि विकास और संचालन दोनों तरह के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे उधारी बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा। इस बढ़ती उधारी का सीधा असर ब्याज-भुगतान के रूप में दिख रहा है, जो अब बजट का एक प्रमुख बोझ बन चुका है।

वित्तीय आकलनों से पता चलता है कि देश का बाहरी कर्ज पिछले चार वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ल्ड बैंक के नए आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच बांग्लादेश का बाहरी कर्ज करीब 42 प्रतिशत बढ़कर लगभग 104 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच चुका है। कर्ज में यह वृद्दि निर्यात आय और विदेशी मुद्रा भंडार की कमजोर स्थिति के कारण और अधिक तनाव पैदा कर रही है, क्योंकि ऋण-सेवा की क्षमता सीमित होती जा रही है। घरेलू उधार पर भी अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है, जिसके कारण सरकारी बांडों पर ब्याज भुगतान अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ चुका है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार को रिकॉर्ड स्तर पर कर्ज-सेवा पर खर्च करना पड़ा है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष कर्ज-सेवा का खर्च लगभग 1.35 लाख करोड़ टका के आस-पास पहुँच गया है, जिससे विकास परियोजनाओं के लिए आवंटित धनराशि पर सीधा असर पड़ा है। चालू वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों में ही ब्याज भुगतान 71 हजार करोड़ टका से ज्यादा पहुँच गया, जो पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक है। इस वजह से सरकार को विकास खर्च में कटौती करनी पड़ रही है, जबकि संचालनात्मक व्यय लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का मूल कारण राजस्व-संग्रह की धीमी गति और कर प्रशासन में सुधारों की कमी है। कर आधार सीमित है और कर चोरी रोकने के प्रभावी उपाय अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि राजस्व-संग्रह को आधुनिक प्रणाली, डिजिटल निगरानी और कर-विस्तार के माध्यम से मजबूत नहीं किया गया, तो देश को ऋण-चक्र से बाहर निकलना मुश्किल होगा। साथ ही, कर्ज प्रबंधन नीति में सुधार और कम लागत वाले दीर्घकालिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने की भी आवश्यकता है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नीति-निर्माताओं के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ हैं—राजस्व बढ़ाना और कर्ज-सेवा बोझ को घटाना। अगर दोनों मोर्चों पर ठोस सुधार नहीं किए गए तो बढ़ता ब्याज-भार शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे जैसे सामाजिक एवं विकास क्षेत्रों में निवेश को सीमित कर सकता है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि आने वाले वर्षों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बांग्लादेश को आक्रामक राजस्व-सुधार और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन अपनाना ही होगा।

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