भारत-EU व्यापार साझेदारी निर्णायक चरण में, अधिकांश अध्यायों पर बनी सहमति

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर वार्ताएँ तेज गति पकड़ चुकी हैं। दोनों पक्ष इस प्रयास में जुटे हैं कि वार्ता के शेष हिस्सों को शीघ्रता से पूरा किया जाए, ताकि समझौते की औपचारिक घोषणा जल्द की जा सके। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल के बयान में स्पष्ट किया कि सरकार पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ FTA को अंतिम रूप देने पर काम कर रही है। उनका कहना है कि भारत और ईयू दोनों ही इस समझौते को संतुलित, पारदर्शी और परस्पर हितों के अनुरूप बनाना चाहते हैं।

पिछले कुछ महीनों में हुई लगातार तकनीकी और नीतिगत बैठकों ने वार्ता को नई दिशा दी है। ब्रसेल्स और नई दिल्ली में दोनों पक्षों के अधिकारियों ने कई दौर की बैठकें की हैं, जिनमें व्यापार, निवेश, बाजार-प्रवेश, नियम-विधान और टैरिफ संरचना से जुड़े अहम मुद्दों पर काफी प्रगति दर्ज की गई है। हालांकि अभी भी कुछ संवेदनशील अध्याय ऐसे हैं जिन पर अंतिम सहमति बनना शेष है, लेकिन यह माना जा रहा है कि बातचीत अब निष्कर्ष की ओर बढ़ रही है।

वार्ता के प्रमुख बिंदुओं में ऑटोमोबाइल और ऑटो-पार्ट्स, इस्पात, कृषि-उत्पाद, तकनीकी मानक, डेटा-संबंधी प्रावधान और कार्बन कर (Carbon Adjustment) जैसे विषय शामिल हैं। यूरोपीय संघ अपनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की अपेक्षा रखता है, जबकि भारत का ध्यान इस बात पर है कि घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हुए बिना निर्यात के नए अवसर खुलें। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिखते हैं कि समझौता टिकाऊ विकास और उचित प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-EU FTA लागू होने पर दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और निवेश प्रवाह में बड़ा उछाल आ सकता है। भारत के लिए फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल, रसायन, ऑटो-कंपोनेंट और आईटी-सेवाओं के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारतीय बाजार में वाहन, मशीनरी, वाइन और डेयरी जैसे क्षेत्रों में बेहतर पहुंच मिल सकती है। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी निर्भरता मजबूत होगी और वैश्विक सप्लाई-चेन को भी स्थिरता मिलेगी।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बातचीत के कई अध्याय लगभग सहमति के अंतिम चरण में हैं, जबकि कुछ हिस्सों पर अभी भी तकनीकी समन्वय की जरूरत है। भारत ने यह स्पष्ट किया है कि समझौते की गुणवत्ता और संतुलन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसीलिए अंतिम हस्ताक्षर तभी होंगे, जब सभी लंबित बिंदुओं पर व्यापक सहमति बन जाएगी।

कुल मिलाकर, भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता अब अपने सबसे निर्णायक दौर में है। यदि वार्ता वर्तमान गति से आगे बढ़ती रही, तो जल्द ही दोनों पक्ष एक ऐतिहासिक व्यापारिक साझेदारी की घोषणा कर सकते हैं, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाई तक पहुँचाने की क्षमता रखती है।

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