तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक भूचाल, मंत्री पर 1,020 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप

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तमिलनाडु में नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग के मंत्री के. एन. नेहरू एक बड़े विवाद में घिर गए हैं, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन पर करीब 1,020 करोड़ रुपये के अवैध धन संग्रह और टेंडर में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ईडी ने हाल ही में राज्य सरकार के मुख्य सचिव, डीजीपी और सतर्कता विभाग को 250 से अधिक पन्नों का विस्तृत दस्तावेज भेजा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि मंत्री के विभाग से जुड़े कई सार्वजनिक निर्माण और जलापूर्ति परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ की गई। एजेंसी का कहना है कि विभिन्न ठेकों को पहले से तय ठेकेदारों के पक्ष में प्रभावित किया गया, बदले में उनसे 7.5% से 10% तक की कटौती के रूप में बड़े पैमाने पर धन लिया गया, जो बाद में कथित तौर पर रिश्वत या राजनीतिक उपयोग के लिए एकत्र किया गया।

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार जांच के दौरान ठेकों से संबंधित बैंक ट्रांजेक्शन, हवाला लेनदेन, नकदी प्रवाह, व्हाट्सऐप चैट, मोबाइल डेटा और स्थानों से बरामद तस्वीरों सहित कई साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी ने दावा किया है कि ये सभी दस्तावेज छापेमारी के दौरान चेन्नई, कोयम्बत्तूर, त्रिची और अन्य स्थानों पर की गई तलाशी में सामने आए। इन दस्तावेजों के आधार पर ईडी ने राज्य एजेंसियों से अपेक्षा की है कि वे संबंधित धाराओं के तहत नई एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई करें। एजेंसी का यह भी कहना है कि यदि राज्य निकाय समय पर कार्रवाई नहीं करते, तो इसे जांच में बाधा और आरोपियों को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

इस मामले पर अभी तक मंत्री के. एन. नेहरू की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, हालांकि राजनीतिक हलकों में इस रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है, क्योंकि नेहरू तमिलनाडु की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और जिस विभाग के वे प्रभारी हैं, उसमें बड़े पैमाने पर सरकारी परियोजनाओं और वित्तीय लेनदेन होते हैं। यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी साल ईडी ने उनके आवास और उनसे संबंधित परिसरों पर छापेमारी कर कई दस्तावेज जब्त किए थे, जिनसे जुड़े कुछ तथ्य अब इस नए डोजियर में शामिल किए गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार, विपक्ष और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है, जबकि आगे की कार्रवाई अब राज्य पुलिस और न्यायिक संस्थानों पर निर्भर करती है।

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