संविधान दिवस समारोह: पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में संसद में प्रस्तावना का सामूहिक पाठ

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025: देशभर में आज 76वाँ संविधान दिवस अत्यंत गरिमा और परंपरागत सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में मुख्य समारोह आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य और सभी दलों के सांसद उपस्थित रहे। समारोह के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान राष्ट्र की आत्मा है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर भारत की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान ने भारत को न केवल दिशा दी है, बल्कि अरबों भारतीयों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने तथा उनका सम्मान करने की प्रेरणा भी दी है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश तभी आगे बढ़ता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत आज वैश्विक नेतृत्व की राह पर आगे बढ़ रहा है, और इस यात्रा में संविधान हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। संसद के भीतर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में यह भावना व्यक्त की कि संविधान भारत को एकता के सूत्र में पिरोए रखने का सबसे मजबूत माध्यम है और हर नागरिक का दायित्व है कि वह इसके मूल्यों को जीवन में उतारे।

समारोह के दौरान संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया गया, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू ने नेतृत्व किया। संसद के बाहर भी देश के विभिन्न नागरिक समूहों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और सरकारी दफ्तरों में बड़े स्तर पर प्रस्तावना का पठान किया गया। इस बार के समारोह का विशेष आकर्षण वह क्षण रहा जब संविधान के नौ भारतीय भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया—में अनूदित संस्करणों का विमोचन किया गया। इसके साथ ही ‘भारत का संविधान: कला और कैलीग्राफी’ शीर्षक से एक विशेष स्मारिका भी जारी की गई, जिसका उद्देश्य संविधान से जुड़ी कला, सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाना है।

पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ यह समारोह न केवल देश की संवैधानिक विरासत का स्मरण कराने वाला अवसर था, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों की पुनर्पुष्टि भी, जिन पर आधुनिक भारत की नींव टिकी है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और संविधान के प्रति नई प्रतिबद्धता के संकल्प के साथ हुआ, जो देश को एक लोकतांत्रिक, समावेशी और प्रगतिशील दिशा में आगे बढ़ाने के संकल्प को और सुदृढ़ करता है।

Leave a Comment

और पढ़ें