भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय रिश्ते लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के हाई-कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने हाल ही में दिए अपने विस्तृत वक्तव्य में कहा कि दोनों देशों के संबंध अब मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अब केवल व्यापारिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल, क्रिटिकल माइनरल्स, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसी बहुआयामी साझेदारी की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच विश्वास की नींव पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और आने वाले वर्षों में यह संबंध वैश्विक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ क्रिटिकल माइनरल्स के क्षेत्र में व्यापक सहयोग चाहता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर स्टोरेज और हरित ऊर्जा परिवर्तन की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया में लिथियम, कॉबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं, जिनकी भारत को स्वच्छ ऊर्जा उद्योग विकसित करने के लिए आवश्यकता है। फिलिप ग्रीन ने बताया कि दोनों देश मिलकर ऐसी सप्लाई चेन बनाना चाहते हैं जो सुरक्षित भी हो और स्थायी भी, ताकि भविष्य के उद्योगों को निरंतर ऊर्जा और संसाधन उपलब्ध हो सकें।
खेल सहयोग भी भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक नया और महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। फिलिप ग्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी खेल अवसंरचना, स्टेडियम प्रबंधन, खेल तकनीक, कोचिंग मॉडल और बड़े आयोजनों के अनुभव को भारत के साथ साझा करने के लिए उत्सुक है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट की पारंपरिक साझेदारी से आगे अब बहुआयामी खेल संबंध विकसित हो रहे हैं, जिससे एथलीट प्रशिक्षण, खेल व्यवसाय, खेल पर्यटन और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तैयार होंगे।
रणनीतिक क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। फिलिप ग्रीन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के पक्षधर हैं। क्वाड जैसी बहुपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, रक्षा आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक सपोर्ट और तकनीकी साझेदारी को और मज़बूत किया जा रहा है। यह सहयोग न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती देगा बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।
फिलिप ग्रीन ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य का भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्ता नवाचार, हरित उद्योग, शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में गहराई से विस्तारित होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं और एक-दूसरे के लिए भरोसेमंद साझेदार बने रहेंगे। उनकी टिप्पणी से यह साफ झलकता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक समग्र और बहु-क्षेत्रीय साझेदारी में विकसित होगा।













