भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) में कहा कि आसियान भारत की ‘Act East’ नीति का अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत इस मंच को इंडो-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम मानता है। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अब सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि व्यावहारिक साझेदारी और सहयोगी कदमों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत और आसियान के बीच संबंध केवल भौगोलिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि साझा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक मूल्यों पर आधारित हैं। भारत ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि इंडो-प्रशांत क्षेत्र मुक्त, समावेशी और सभी के लिए समान अवसर वाला हो। राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा को भारत-आसियान सहयोग का केंद्र बताया और कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा, संप्रभुता का सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
रक्षा मंत्री ने ADMM-Plus की 15वीं वर्षगांठ पर इस मंच की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह प्लेटफ़ॉर्म रक्षा सहयोग को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत-आसियान समुद्री अभ्यास (ASEAN-India Maritime Exercise) के दूसरे संस्करण से दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास और परिचालन सहयोग और भी मजबूत होगा।
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में महिलाओं की भागीदारी, शांति स्थापना अभियानों में सहयोग, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे विषयों पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर की रक्षा साझेदारियों में तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और रक्षा उत्पादन के क्षेत्रों में भी समान भागीदारी जरूरी है ताकि दीर्घकालिक स्थिरता कायम रखी जा सके।
बैठक के दौरान भारत के रक्षा मंत्री ने कई द्विपक्षीय वार्ताएं भी कीं, जिनमें आसियान देशों के प्रतिनिधियों के साथ सामरिक सहयोग को गहराने, संयुक्त अभ्यासों की रूपरेखा तय करने और रक्षा उद्योग में पारस्परिक निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
विश्लेषकों के अनुसार, राजनाथ सिंह का यह बयान भारत की ‘Act East’ नीति के तहत आसियान को केंद्र में रखने के भारत के दृष्टिकोण को और स्पष्ट करता है। बीते कुछ वर्षों में भारत-आसियान के बीच बढ़ते रक्षा अभ्यास, आपदा राहत सहयोग और सामरिक संवाद यह संकेत देते हैं कि भारत इस क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।
अंत में, राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और आसियान के बीच संबंधों को और अधिक व्यवहारिक तथा परिणामोन्मुख बनाना ही आने वाले वर्षों में इंडो-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि की कुंजी होगी।













