चक्रवाती तूफान डिटवाह से श्रीलंका में भारी तबाही के बाद भारत ने तुरंत मानवीय सहायता बढ़ाते हुए संकटग्रस्त पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़े होने का संदेश दिया है। तेज़ हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण श्रीलंका के कई हिस्सों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हुए, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए। इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने तेजी से राहत और पुनर्निर्माण सहयोग का ऐलान किया।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया, जिसके तहत भोजन, दवाइयों, तंबुओं, कपड़ों, पानी शुद्ध करने के उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री श्रीलंका भेजी गई। भारतीय नौसेना और वायुसेना के माध्यम से राहत सामग्री को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया गया, ताकि जरूरतमंद लोगों को त्वरित सहायता मिल सके। इसके साथ ही राहत और बचाव कार्यों में सहयोग के लिए विशेषज्ञ टीमें भी तैनात की गईं।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि भारत इस कठिन समय में पूरी तरह साथ खड़ा है। उन्होंने घोषणा की कि भारत श्रीलंका को 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का सहायता पैकेज प्रदान करेगा। इस पैकेज में रियायती ऋण और अनुदान शामिल है, जिसका उपयोग सड़कों, पुलों, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और कृषि क्षेत्र के पुनर्निर्माण में किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास और भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
डॉ. जयशंकर ने इस मौके पर भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ आपसी सहयोग, विश्वास और साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट के समय सहायता देना भारत की कूटनीति और मूल्यों का अहम हिस्सा है। यह पहल भारत-श्रीलंका के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को और मजबूत करती है।
श्रीलंका सरकार ने भारत की त्वरित और व्यापक सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है और इसे दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक बताया है। अधिकारियों का कहना है कि भारत की मदद से राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को गति मिलेगी और प्रभावित लोगों को जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिलेगी।
कुल मिलाकर, डिटवाह तूफान के बाद भारत की यह पहल न केवल मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और पड़ोसी देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करती है।













