भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाते हुए स्वदेशी मिसाइल प्रणाली आकाश-एनजी (Next Generation) को सफलतापूर्वक विकसित कर लिया है। यह मिसाइल आकाश प्रणाली का उन्नत संस्करण है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय उद्योगों के सहयोग से तैयार किया है। आकाश-एनजी को आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह भारतीय सेना व वायुसेना की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
आकाश-एनजी मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 60 किलोमीटर या उससे अधिक है, जो इसे पहले के संस्करणों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी बनाती है। यह मिसाइल अत्यधिक तेज़ गति से उड़ान भरते हुए दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलों और अन्य हवाई लक्ष्यों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। इसकी उच्च गति और सटीकता इसे आधुनिक युद्ध परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बनाती है।
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका लगभग 96 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री से निर्मित होना है। इसमें स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर, आधुनिक रडार प्रणाली, कमांड और कंट्रोल सिस्टम तथा उन्नत ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है। यह तकनीक मिसाइल को बेहतर नियंत्रण, अधिक रेंज और लक्ष्य पर सटीक वार करने की क्षमता प्रदान करती है।
आकाश-एनजी को मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है, जिससे इसे किसी भी इलाके में तेजी से तैनात किया जा सकेगा। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है, जिससे देश की सीमाओं और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा और मजबूत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल विशेष रूप से तेजी से बदलते हवाई खतरों और लो-रडार सिग्नेचर वाले लक्ष्यों के खिलाफ बेहद प्रभावी साबित होगी।
आकाश-एनजी का विकास भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भविष्य में रक्षा निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। कुल मिलाकर, आकाश-एनजी मिसाइल भारत की वायु रक्षा प्रणाली को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली एक अहम उपलब्धि है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगी।













