CBI चार्जशीट: फर्जी कंपनियों और विदेशी लिंक से निवेशकों को लगाया गया करोड़ों का चूना

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने देश के अब तक के सबसे बड़े साइबर और निवेश घोटालों में से एक का खुलासा करते हुए चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 111 फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिये करीब एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार यह घोटाला केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार विदेश, खासतौर पर चीन से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी विदेशी कनेक्शन को चार्जशीट में ‘ड्रैगन कनेक्शन’ के रूप में रेखांकित किया गया है, जिसने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है।

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह पूरा फ्रॉड एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया, जिसमें दर्जनों शेल यानी कागजी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था, बल्कि इन्हें सिर्फ अवैध तरीके से जुटाए गए पैसों को इधर-उधर घुमाने और विदेश भेजने के लिए बनाया गया था। एजेंसी के मुताबिक इन फर्जी कंपनियों के माध्यम से निवेशकों से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स के जरिये पैसे जमा कराए गए और फिर उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि असली स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता न चल सके।

चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि निवेशकों को हाई रिटर्न का लालच देकर एक खास तरह की स्कीम में फंसाया गया, जिसे क्रिप्टो माइनिंग या डिजिटल टोकन से जुड़ा निवेश बताया जाता था। HPZ टोकन नामक एक ऐप और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म का जिक्र भी जांच में आया है, जिसके जरिए हजारों लोगों से रकम वसूली गई। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को मामूली मुनाफा दिखाया गया, ताकि उनका भरोसा जीता जा सके, लेकिन जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, वैसे-वैसे पैसे निकालने के रास्ते बंद कर दिए गए।

सीबीआई के अनुसार इस नेटवर्क को संचालित करने में विदेशी नागरिकों की भी अहम भूमिका रही। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि चीन के कुछ नागरिक इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड थे, जो भारत में अपने सहयोगियों के जरिए फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का संचालन कर रहे थे। चार्जशीट में कई भारतीय आरोपियों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनियां खोलने, बैंक खाते संचालित करने और पैसों की लेनदेन में मदद करने का आरोप है। कुछ मामलों में क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल करेंसी और यहां तक कि सोने में निवेश के जरिए भी पैसों को ठिकाने लगाने की बात सामने आई है।

जांच के दौरान सीबीआई ने देश के कई राज्यों में छापेमारी की, जहां से बड़ी संख्या में डिजिटल सबूत, बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क था, जिसमें छोटी-छोटी रकम को कई खातों में घुमाकर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इस तरीके से न केवल जांच एजेंसियों की नजरों से बचने की कोशिश की गई, बल्कि पीड़ित निवेशकों के लिए भी अपने पैसे वापस पाना बेहद मुश्किल हो गया।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में यह भी स्पष्ट किया है कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में फर्जी कंपनियों, खातों और आरोपियों की संख्या को लेकर कुछ अंतर जरूर है, लेकिन जांच एजेंसी का फोकस इस पूरे नेटवर्क की संरचना और पैसों के प्रवाह को उजागर करने पर है। एजेंसी आगे की जांच में इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिरकार यह पैसा किन देशों में गया और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन निवेश, फर्जी ऐप्स और साइबर ठगी के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आम लोगों को ऐसे लुभावने ऑफर्स से सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी अनजान प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए। फिलहाल सीबीआई इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान, विदेशों में भेजी गई रकम की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की दिशा में काम कर रही है।

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