तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा राजनीतिक और सामाजिक दांव चला है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘कலைஞर महालिर उरिमै थिट्टम’ का दायरा बढ़ाते हुए इसके दूसरे चरण की शुरुआत की गई है। इस विस्तार के तहत करीब 17 लाख नई महिलाओं को योजना से जोड़ा गया है, जिससे कुल लाभार्थियों की संख्या 1.30 करोड़ से अधिक हो गई है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को घरेलू खर्चों में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने योजना के विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक वित्तीय सहायता योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सरकार का मानना है कि इस सहायता से खासकर गृहिणियों, निम्न और मध्यम वर्ग की महिलाओं को राहत मिलेगी और वे दैनिक जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगी। अधिकारियों के अनुसार, लाभार्थियों की पहचान पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई है और भुगतान पूरी तरह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जाएगा।
राजनीतिक रूप से इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार पर चुनाव से पहले लोकलुभावन कदम उठाने का आरोप लगाया है, वहीं डीएमके सरकार का कहना है कि यह योजना चुनावी नहीं बल्कि जनकल्याण की सोच का हिस्सा है, जिसे पहले भी लागू किया गया था और अब उसके सकारात्मक असर को देखते हुए इसका विस्तार किया गया है। सरकार का दावा है कि योजना से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है और पारिवारिक स्तर पर निर्णय लेने में उनकी भूमिका मजबूत हुई है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में योजना की राशि और दायरे की समीक्षा की जा सकती है। इसके साथ ही सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सहायता वास्तव में जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे। कुल मिलाकर, विधानसभा चुनाव से पहले स्टालिन सरकार का यह कदम न केवल राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, बल्कि इसे तमिलनाडु में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी बताया जा रहा है।













