दूषित पानी से मौतों के बाद एक्शन मोड में CM मोहन, निगम अधिकारियों पर कार्रवाई

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इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति एक बड़े मानवीय संकट के रूप में सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में पीने के पानी में सीवेज मिलने से हालात बेकाबू हो गए। नर्मदा जल आपूर्ति लाइन में तकनीकी खराबी और पाइपलाइन लीकेज के कारण गंदा पानी सप्लाई में मिल गया, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही थी और रंग भी बदला हुआ था, इसके बावजूद लंबे समय तक शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि इलाके में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन के मामलों में अचानक तेज़ी आई। सरकारी और निजी अस्पतालों में सैकड़ों मरीज भर्ती किए गए, जबकि कई की हालत गंभीर बताई गई। अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे में 7 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर सर्वे कर हजारों लोगों की जांच कराई और प्रभावित क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया।

मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम आयुक्त से पूरे घटनाक्रम पर जवाब तलब किया और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत नगर निगम के अपर आयुक्त को पद से हटा दिया गया, जबकि प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर भी प्रशासनिक गाज गिरी। आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों के जीवन से जुड़ी ऐसी लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और सभी बीमार लोगों का इलाज पूरी तरह मुफ्त कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रभावित इलाकों में तत्काल साफ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए टैंकरों की आपूर्ति शुरू कराई गई।

इस मामले ने प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ न्यायिक और मानवाधिकार संस्थाओं का भी ध्यान खींचा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं, हाईकोर्ट ने भी साफ पानी की निर्बाध आपूर्ति और पीड़ितों को समुचित इलाज उपलब्ध कराने को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत और शिकायतों पर कार्रवाई की जाती, तो इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी। फिलहाल प्रशासन पानी की लाइनों की जांच, मरम्मत और शुद्धिकरण के काम में जुटा है। सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जल आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और सुधार का भरोसा दिलाया है।

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