भारतीय शेयर बाजार में 2025 के दौरान निवेशकों के लिए मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला है। इस साल बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 30 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 475 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जो अब तक के उच्च स्तरों में से एक है। यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती, कॉरपोरेट आय में सुधार और निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
बीएसई सेंसेक्स ने पूरे साल लगभग 9 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों को अच्छा लाभ मिला। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने लचीलापन दिखाया। निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत मिला।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) का रुख इस साल मिला-जुला रहा। साल के शुरुआती महीनों में वैश्विक कारकों के कारण एफआईआई ने भारतीय बाजार से कुछ पूंजी निकाली, लेकिन इसके बावजूद बाजार पर बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ा। साल के अंत की ओर विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित खरीदारी के संकेत भी मिले, जिससे आने वाले समय में निवेश प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद बनी है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। म्यूचुअल फंड, SIP और बीमा कंपनियों के जरिए लगातार निवेश होता रहा, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से बाजार में स्थिरता बनी रही और लंबी अवधि के लिए सकारात्मक माहौल बना।
कुल मिलाकर, 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए उपलब्धियों भरा साल रहा है। निवेशकों की कुल संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की बढ़ोतरी, बीएसई का करीब 9 प्रतिशत रिटर्न और मजबूत घरेलू निवेश ने यह साबित किया कि भारतीय बाजार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आकर्षक निवेश गंतव्य बना हुआ है।













