आरएसएस प्रमुख का बयान: मणिपुर में शांति बहाल करना आसान नहीं, समय लगेगा

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पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष और सामाजिक असंतुलन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में अलग‑अलग गुटों के बीच मतभेद और आपसी लड़ाई को तुरंत सुलझाना संभव नहीं है और इसके समाधान में समय और धैर्य दोनों की आवश्यकता होगी। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में मौजूदा चुनौतियों को केवल प्रशासनिक कदमों से नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है। विभिन्न समुदायों के बीच मौजूद भावनात्मक दूरी और अविश्वास को मिटाने के लिए विस्तृत संवाद और बातचीत जरूरी है।

आरएसएस प्रमुख ने बताया कि संघ की टीमें मणिपुर में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये टीमें विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों के साथ बातचीत कर रही हैं और लोगों का भरोसा जीतने के प्रयास में लगी हैं। भागवत के अनुसार संवाद ही वह मार्ग है जिससे सभी पक्षों को साझा मंच पर लाया जा सके, और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिले। उनका मानना है कि शांति स्थापित करना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है।

मणिपुर लंबे समय से जातीय हिंसा और संघर्ष का सामना कर रहा है। यहां मुख्य रूप से मेइतेई और कुकी‑नागा समुदायों के बीच विवाद बढ़ता रहा है, जो मूल रूप से आरक्षण, राजनीतिक अधिकार और पहचान की मांगों से संबंधित हैं। 2023 से जारी इस संघर्ष में कई लोगों की जानें गईं, हजारों लोग विस्थापित हुए और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।

विश्लेषकों के अनुसार, मणिपुर का यह संघर्ष केवल कानून‑व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पहचान, संसाधनों और समुदायों के बीच समान अधिकार की मांगों का मिश्रण भी है। इसलिए इसे केवल प्रशासनिक उपायों से हल करना संभव नहीं है। इसके लिए समग्र सामाजिक समझ, सामुदायिक संवाद और विश्वास बहाली आवश्यक है।

भागवत ने यह भी कहा कि इस जटिल स्थिति में धैर्य और साझा प्रयास ही स्थायी शांति की कुंजी हैं। संघ के स्वयंसेवक वर्तमान में लोगों के बीच शांति बहाली के प्रयासों में लगे हुए हैं और कोशिश कर रहे हैं कि विभिन्न गुटों के बीच सहिष्णुता और सामंजस्य स्थापित किया जा सके। उनके अनुसार मणिपुर में शांति का मार्ग लंबा है, लेकिन सही दिशा और सामूहिक प्रयास से इसे स्थायी रूप दिया जा सकता है।

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