MEA की दो टूक: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत गंभीर

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भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे कथित हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि वह पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ सामने आ रही हिंसा और उत्पीड़न की खबरों पर लगातार नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार, मानवाधिकारों का सम्मान और सभी नागरिकों की सुरक्षा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल जिम्मेदारी है, और बांग्लादेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां अल्पसंख्यक सुरक्षित महसूस करें।

MEA ने दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन को लेकर भ्रामक बातें फैलाई गईं, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, न तो किसी ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की और न ही उच्चायोग की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसा कोई कदम उठाया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही कूटनीतिक परिसरों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन भी अनिवार्य है।

बांग्लादेश में हाल के दिनों में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ा है। कुछ घटनाओं के बाद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें हिंसा और आगजनी की खबरें भी सामने आईं। इसी पृष्ठभूमि में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं ने चिंता को और गहरा कर दिया है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मंदिरों, घरों और व्यवसायों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

भारत ने दो टूक कहा है कि वह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता, लेकिन मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर करना उसका अधिकार और दायित्व है। विदेश मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि भारत कूटनीतिक माध्यमों से इस विषय को उठाता रहेगा और उम्मीद करता है कि बांग्लादेश सरकार स्थिति को नियंत्रित करने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

कुल मिलाकर, भारत की यह प्रतिक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता, मानवीय मूल्यों और पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की उसकी नीति को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग के जरिए ही इस तरह की संवेदनशील स्थितियों का समाधान निकल सकता है, ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बना रहे।

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