बांग्लादेश संकट पर पूर्व थल सेना प्रमुख का संदेश, क्षेत्रीय शांति को बताया भारत के लिए अहम

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसक घटनाओं के बीच भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे का बयान चर्चा में है। उन्होंने पड़ोसी देशों की स्थिति को भारत के भविष्य से जोड़ते हुए कहा है कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग सभी देशों के साझा हित में है। जनरल नरवणे के अनुसार भारत और उसके पड़ोसी देशों का भविष्य आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है और किसी एक देश में अस्थिरता का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।

बांग्लादेश में हाल के दिनों में राजनीतिक तनाव, विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ छात्र और राजनीतिक संगठनों से जुड़े मामलों के बाद हालात और बिगड़े, जिससे राजधानी ढाका सहित कई इलाकों में तनाव का माहौल बन गया। इन घटनाओं ने न सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत से सटी सीमा वाले इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जनरल मनोज नरवणे ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक रिश्तों का पक्षधर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता, लेकिन क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं से हालात और बिगड़ सकते हैं, इसलिए संयमित बयानबाजी और कूटनीतिक समझदारी की जरूरत है।

पूर्व सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत पड़ोसी देशों के साथ सहयोग, संवाद और आपसी सम्मान पर आधारित है। चाहे व्यापार हो, सुरक्षा हो या मानवीय सहयोग—भारत हमेशा यह मानता है कि मजबूत और स्थिर पड़ोसी ही देश की प्रगति में सहायक होते हैं। बांग्लादेश के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं और ऐसे में वहां की शांति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, जनरल नरवणे का बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की स्थिति पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। उनका संदेश साफ है कि भारत और उसके पड़ोसी देशों का भविष्य अलग-अलग नहीं बल्कि साझा है। ऐसे में संवाद, शांति और स्थिरता ही आगे का रास्ता है, जिससे न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरा दक्षिण एशिया सुरक्षित और समृद्ध रह सके।

Leave a Comment

और पढ़ें