भारत की संप्रभुता पर थरूर का जोर, ट्रंप के व्यापारिक धमकी वाले दावे को नकारा

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज किया है, जिसमें उन्होंने यह कहा था कि व्यापार या टैरिफ से जुड़ी धमकियों के जरिए भारत और संबंधित पक्षों के बीच सीजफायर कराया गया। थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सरकार ने किसी भी स्तर पर व्यापार रोकने या आर्थिक दबाव की कोई धमकी न तो स्वीकार की और न ही ऐसी किसी परिस्थिति में निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, इस तरह के दावे तथ्यात्मक आधार पर खरे नहीं उतरते और वास्तविक कूटनीतिक प्रक्रियाओं को गलत तरीके से पेश करते हैं।

शशि थरूर ने यह भी कहा कि भारत की विदेश और सुरक्षा नीति पूरी तरह संप्रभु निर्णयों पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीजफायर या किसी भी सैन्य-कूटनीतिक कदम का फैसला सरकार द्वारा आंतरिक विचार-विमर्श, सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाता है, न कि किसी बाहरी देश के दबाव में आकर। थरूर के मुताबिक, यह कहना कि किसी विदेशी नेता ने आर्थिक धमकी देकर भारत को किसी निर्णय के लिए मजबूर किया, भारत की संस्थागत मजबूती और कूटनीतिक परिपक्वता को कमतर आंकने जैसा है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में ट्रंप के उन सार्वजनिक बयानों का जिक्र होता है, जिनमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह संकेत दिया था कि व्यापारिक दबावों का इस्तेमाल कर उन्होंने विभिन्न वैश्विक टकरावों को शांत कराने में भूमिका निभाई। भारत के संदर्भ में ऐसे दावों के सामने आने के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में सवाल उठे, जिसके बाद शशि थरूर का यह बयान सामने आया। थरूर ने सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत ने कभी भी अपनी नीतियों को किसी प्रकार की व्यापारिक धमकी के आगे झुकाकर नहीं बदला।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नेताओं के बयान कई बार घरेलू या वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखकर दिए जाते हैं, लेकिन उनकी सच्चाई को तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर परखा जाना चाहिए। थरूर के अनुसार, भारत जैसे लोकतांत्रिक और आत्मनिर्भर देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया पारदर्शी और संस्थागत है, जहां किसी एक बाहरी दबाव के आधार पर बड़े फैसले नहीं लिए जाते।

कुल मिलाकर, शशि थरूर का यह बयान न केवल ट्रंप के दावे का खंडन करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इस मुद्दे पर उन्होंने सरकार के साथ खड़े होकर भारत की विदेश नीति और संप्रभु निर्णय-क्षमता का समर्थन किया है। यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति जैसे संवेदनशील मामलों में भारत अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए स्वतंत्र रूप से फैसले करता है।

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