प्रदूषण से बेहाल दिल्ली-एनसीआर, सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की

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दिल्ली-एनसीआर में लगातार गंभीर होती वायु गुणवत्ता को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया है, जहां सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। खराब मौसमीय परिस्थितियां, कम हवा की गति और घना कोहरा प्रदूषक कणों को वातावरण में जमा होने से रोक नहीं पा रहे हैं, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार संस्थाओं ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के कड़े प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत कई जगहों पर निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और स्कूलों में ऑनलाइन या हाइब्रिड कक्षाओं जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल औपचारिक सुनवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समस्या के स्थायी समाधान पर जोर देगा। अदालत ने यह भी कहा है कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है, इसलिए ऐसे व्यावहारिक और संतुलित आदेश जरूरी हैं जिनका पालन सभी स्तरों पर संभव हो। कोर्ट ने वकीलों और पक्षकारों को अत्यधिक प्रदूषण के मद्देनजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की सलाह भी दी है।

17 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में GRAP के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण, पराली जलाने जैसी समस्याओं तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही, सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों, अस्पतालों और संवेदनशील वर्गों के लिए अतिरिक्त कदमों पर भी अदालत का ध्यान केंद्रित रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।

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