केरल में हुए स्थानीय निकाय (लोकल बॉडी) चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझानों में राज्य की राजनीति की तस्वीर बदलती हुई नजर आ रही है। 9 और 11 दिसंबर को हुए मतदान के बाद 13 दिसंबर को सुबह मतगणना शुरू हुई, जिसमें पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम वोटों की गिनती की गई। शुरुआती रुझानों से यह साफ हुआ कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में मतदाताओं का रुझान अलग-अलग दिशाओं में दिखाई दे रहा है, जिससे तीनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों—यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए—के लिए अलग-अलग संकेत सामने आए हैं।
त्रिशूर जिले में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। शुरुआती रुझानों के अनुसार यहां कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने बढ़त बना ली है और कई वार्डों में उसने बीजेपी को पीछे छोड़ दिया है। त्रिशूर को पहले बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र माना जा रहा था, लेकिन इन रुझानों ने पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूडीएफ की यह बढ़त शहरी मतदाताओं के बीच उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
वहीं राजधानी तिरुवनंतपुरम में सत्तारूढ़ एलडीएफ और कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देते हुए एनडीए ने मजबूत प्रदर्शन किया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक तिरुवनंतपुरम नगर निगम और आसपास के इलाकों में एनडीए कई सीटों पर आगे चल रहा है। यह परिणाम इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि लंबे समय से राजधानी क्षेत्र पर वामपंथी दलों का प्रभाव रहा है। ऐसे में एनडीए की बढ़त को राज्य की राजनीति में एक नए बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, शुरुआती रुझानों से यह स्पष्ट है कि केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में शहरी इलाकों में यूडीएफ ने बढ़त बनाई है, जबकि तिरुवनंतपुरम में एनडीए ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में एलडीएफ की पकड़ अब भी बनी हुई नजर आ रही है। अंतिम नतीजे आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी, लेकिन ये रुझान आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए अहम संदेश जरूर दे रहे हैं।













