कर्नाटक: मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सस्पेंस, नेतृत्व परिवर्तन पर खड़गे का बड़ा बयान

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन से जुड़ा कोई भी फैसला केवल पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने, दोबारा चर्चा करने या नेतृत्व के नए विकल्प तलाशने जैसी बातें मीडिया में भले ही लगातार उठ रही हों, लेकिन कांग्रेस बिना व्यापक विचार-विमर्श के ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगी। खड़गे के अनुसार, यह व्यक्तिगत स्तर का विषय नहीं है, बल्कि पार्टी संगठन से जुड़ा मामला है, जिसका फैसला सामूहिक रूप से ही लिया जाएगा।

पिछले कुछ दिनों में दिल्ली और बेंगलुरु में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की बैठकों ने कर्नाटक की सियासत को और गरम कर दिया है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे स्वयं इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को भी दिल्ली बुलाया जा सकता है ताकि दोनों पक्षों की राय सुनकर स्थिति स्पष्ट की जा सके। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जो भी अटकलें सामने आ रही हैं, वे तभी खत्म होंगी जब शीर्ष नेतृत्व औपचारिक निर्णय करेगा।

नेतृत्व परिवर्तन की बातों का एक दूसरा पहलू यह भी माना जा रहा है कि डी.के. शिवकुमार के समर्थक लगातार सक्रिय हैं और वे 2023 में कथित तौर पर हुए किसी अनौपचारिक ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूले’ का हवाला दे रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने अनुभव, प्रशासनिक नियंत्रण और विधायकों के समर्थन को मजबूती से दिखा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर ये दो धड़े समय–समय पर सक्रिय रहते हैं, जिसके कारण इस तरह की चर्चाएँ तेज हो जाती हैं।

इस राजनीतिक हलचल के बीच विपक्षी भाजपा भी सक्रिय हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार अंदरूनी कलह में फंसी हुई है और इसका सीधा असर प्रशासन और जनता से जुड़े फैसलों पर पड़ रहा है। भाजपा नेताओं के अनुसार, कांग्रेस सरकार स्थिर नहीं दिख रही और यदि पार्टी शीर्ष नेतृत्व समय रहते स्थिति नहीं संभालता, तो राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि सरकार स्थिर है तथा बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है।

हालाँकि, अंतिम निर्णय अभी भी कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर ही लंबित है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने जोर देकर कहा है कि किसी भी तरह का निर्णय संतुलित विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा और जल्दबाज़ी से पार्टी में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो भी फैसला होगा, वह राहुल गांधी, सोनिया गांधी और उनके संयुक्त सलाह-मशवरे के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल, कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सस्पेंस कायम है, और सभी की निगाहें कांग्रेस हाई कमान पर टिकी हुई हैं।

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