सरकारी परिसरों में संघ की शाखाओं पर लगी रोक पर हाईकोर्ट का स्टे जारी, सरकार को फिर झटका

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कर्नाटक सरकार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य संगठनों की सरकारी परिसरों में गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश  पर लगी रोक हटाने की याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद सरकार के 18 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश पर लगी अंतरिम रोक (स्टे) बरकरार रहेगी। यह आदेश सरकारी भवनों, स्कूलों, और सार्वजनिक परिसरों में किसी भी निजी संगठन की गतिविधियों के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक बनाता था। हालांकि आलोचकों ने इसे संघ की शाखाओं और मार्च जैसे कार्यक्रमों को निशाना बनाने वाला कदम बताया था।

इससे पहले उच्च न्यायालय की धरवाड़ पीठ ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों — विशेष रूप से अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — का उल्लंघन कर सकता है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्न की एकल पीठ ने कहा था कि “10 या अधिक लोगों के एकत्र होने को अवैध मानना अनुचित है”, क्योंकि ऐसा करने से सामान्य सामाजिक, सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों पर भी अनावश्यक प्रतिबंध लग जाएगा।

राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि आदेश का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, तथा यह किसी विशेष संगठन को निशाना नहीं बनाता। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी सामान्य प्रशासनिक आदेश से नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी प्रतिबंध को लागू करने के लिए विधायिका के स्तर पर ठोस कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं।

उच्च न्यायालय ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश तर्कसंगत और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2025 के लिए तय की है, जिसमें सरकार और याचिकाकर्ता दोनों पक्षों के विस्तृत तर्क सुने जाएंगे। फिलहाल, इस निर्णय के बाद कर्नाटक में सरकारी परिसरों में संघ और अन्य संगठनों की गतिविधियों पर लगी रोक स्थगित रहेगी और उन्हें अस्थायी राहत मिलती रहेगी।

यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे राज्य की कांग्रेस सरकार और संघ समर्थक संगठनों के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। अदालत का यह रुख संघ के लिए राहतभरा तो है, लेकिन सरकार के लिए एक और झटका साबित हुआ है, जो पहले से ही अपने प्रशासनिक आदेशों पर उठे विवादों से जूझ रही है।

Leave a Comment

और पढ़ें