EVM पर जनता का भरोसा: कर्नाटक चुनाव आयोग के सर्वे के बाद सियासी घमासान

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कर्नाटक में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा कराए गए एक हालिया सर्वे ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। “नॉलेज, एटीट्यूड एंड प्रैक्टिस (KAP) एंडलाइन सर्वे” नाम से कराए गए इस अध्ययन में सामने आया है कि राज्य के नागरिकों का बड़ा वर्ग EVM की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर भरोसा करता है। सर्वे में शामिल 5,100 से अधिक लोगों में से करीब 83.61 प्रतिशत ने EVM को भरोसेमंद बताया, जबकि लगभग 69.39 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि EVM से चुनावी नतीजे सटीक और निष्पक्ष आते हैं। यह सर्वे बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूरु जैसे प्रमुख क्षेत्रों में किया गया था, जिससे इसके नतीजों को व्यापक प्रतिनिधित्व वाला माना जा रहा है।

सर्वे के क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कलबुर्गी डिवीजन में सबसे ज्यादा 83 प्रतिशत से अधिक लोगों ने EVM पर भरोसा जताया। मैसूरु में यह आंकड़ा करीब 70 प्रतिशत रहा, जबकि बेलगावी और बेंगलुरु में भी बड़ी संख्या में लोगों ने EVM को विश्वसनीय माना। बेंगलुरु में कुछ उत्तरदाता तटस्थ भी रहे, लेकिन इसके बावजूद EVM के पक्ष में राय रखने वालों की संख्या अधिक रही। चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सर्वे आम मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया और तकनीक को लेकर जागरूकता और विश्वास की स्थिति को दर्शाता है।

इन नतीजों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और खासतौर पर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। BJP नेताओं का कहना है कि यह सर्वे उन आरोपों पर करारा जवाब है, जिनमें EVM और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि जनता का यह भरोसा साबित करता है कि लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था मजबूत है। उन्होंने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस के EVM विरोधी बयानों पर “करारा तमाचा” बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस हारने पर सिस्टम पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी व्यवस्था को स्वीकार कर लेती है।

गौरतलब है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेता पिछले कुछ वर्षों से EVM में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग बार-बार यह स्पष्ट करता आया है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित हैं और आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। कर्नाटक का यह सर्वे ऐसे समय में आया है, जब देश में चुनावी तकनीक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज रहती है। इस सर्वे के नतीजों को BJP जहां जनता के भरोसे की जीत के रूप में पेश कर रही है, वहीं यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बना रह सकता है।

Leave a Comment

और पढ़ें