गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर कर्तव्य पथ पर इस बार भारतीय सेना की परेड एक नए और भावनात्मक अध्याय की गवाह बनेगी। पहली बार सेना अपने ‘मूक योद्धाओं’ को औपचारिक रूप से परेड में शामिल कर देश के सामने प्रस्तुत करेगी। ये वे पशु हैं जिन्होंने सीमाओं पर, दुर्गम इलाकों में और आपदा व सुरक्षा अभियानों के दौरान बिना बोले देश की सेवा की है। इस विशेष प्रस्तुति के जरिए भारतीय सेना न केवल अपनी परंपराओं को सम्मान देगी, बल्कि उन सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता भी प्रकट करेगी जो शब्दों के बिना भी अपने कर्तव्य निभाते हैं।
परेड में भारतीय सेना का रिमाउंट एंड वेटनरी कॉर्प्स (RVC) प्रमुख भूमिका निभाएगा, जो इन पशुओं के प्रशिक्षण, देखभाल और संचालन का दायित्व संभालता है। इस दस्ते में लद्दाख के ठंडे और ऊँचाई वाले इलाकों में तैनात बैक्ट्रियन ऊंट शामिल होंगे, जो दुर्गम क्षेत्रों में रसद पहुंचाने और गश्त में सैनिकों के भरोसेमंद साथी रहे हैं। इनके साथ ही ज़ांस्कर नस्ल के पोनी भी कदमताल करते नजर आएंगे, जो अत्यधिक ठंड और कठिन पहाड़ी रास्तों में भारी सामान ढोने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
परेड का एक विशेष आकर्षण भारतीय सेना के प्रशिक्षित श्वान होंगे, जिन्हें ‘मूक योद्धा’ कहा जाता है। ये कुत्ते आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक खोज, ट्रैकिंग, सुरक्षा ड्यूटी और आपदा राहत जैसे अहम कार्यों में तैनात रहते हैं। कई मौकों पर इन्होंने अपनी सूझबूझ और साहस से सैनिकों और नागरिकों की जान बचाई है। इनके अनुशासन और प्रशिक्षण का प्रदर्शन परेड में लोगों को रोमांचित करेगा।
इसके अलावा, इस बार परेड में शिकारी पक्षियों (रैप्टर्स) को भी शामिल किया जाएगा, जिनका उपयोग निगरानी और सुरक्षा से जुड़े विशेष कार्यों में किया जाता है। आधुनिक चुनौतियों के बीच पारंपरिक तरीकों और प्राकृतिक क्षमताओं का यह संयोजन भारतीय सेना की रणनीतिक सोच और नवाचार को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस 2026 की परेड केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि यह उन अनसुने नायकों को सम्मान देने का मंच बनेगी, जिन्होंने कठोर मौसम, ऊँचे पहाड़ों और जोखिम भरे हालात में देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है। कर्तव्य पथ पर मूक योद्धाओं की यह कदमताल देशवासियों के लिए गर्व, भावनाओं और सम्मान से भरा एक ऐतिहासिक दृश्य होगी।













