पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक और सैन्य हलकों में हलचल मच गई है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हालिया बयान ने न केवल देश के भीतर विवाद खड़ा कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की किरकिरी करा दी है। जरदारी ने स्वीकार किया कि भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि पाकिस्तानी सेना को बंकरों में छिपने की नौबत आ गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद भी सुरक्षा कारणों से बंकर में रहने की सलाह दी गई थी।
राष्ट्रपति के इस कबूलनामे को पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। जरदारी के अनुसार, सैन्य अधिकारियों ने पहले ही आगाह कर दिया था कि हालात युद्ध जैसे बन सकते हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उनके बयान में यह भी संकेत मिला कि उस समय पाकिस्तान में डर और अनिश्चितता का माहौल था, जिससे सेना और राजनीतिक नेतृत्व दोनों दबाव में आ गए थे।
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा उस समय चलाया गया सैन्य अभियान था, जब सीमा पर तनाव चरम पर था। इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने आतंकवाद से जुड़े ठिकानों और सैन्य संरचनाओं को निशाना बनाने की बात कही थी। पाकिस्तान ने बाद में माना कि इस कार्रवाई में उसके कई सैनिक हताहत हुए और बड़ी संख्या में घायल भी हुए। इसके बाद हालात को संभालने के लिए दोनों देशों के बीच सीज़फायर की पहल हुई, जिसमें पाकिस्तान की ओर से पहल किए जाने की चर्चा भी सामने आई।
जरदारी के बयान के बाद पाकिस्तान के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि राष्ट्रपति को इस तरह का बयान सार्वजनिक मंच से देने की जरूरत क्यों पड़ी। आलोचकों का कहना है कि इससे न केवल सेना की छवि को नुकसान पहुंचा है, बल्कि पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति भी कमजोर दिखाई देती है। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है।
कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खुलासे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की स्थिति को और कमजोर कर सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करते हैं।













