रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों को DAC की हरी झंडी

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रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च खरीद संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में एक अहम बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए कई प्रमुख स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह निर्णय भारत की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया-डिफेंस’ अभियान को नई गति देने वाला माना जा रहा है। इन मंजूरियों के जरिए थलसेना, नौसेना और वायुसेना की आधुनिक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

DAC द्वारा जिन परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है, उनमें अत्याधुनिक एकीकृत वायु रक्षा प्रणालियां शामिल हैं, जिनका उद्देश्य देश के संवेदनशील क्षेत्रों को हवाई हमलों, ड्रोन और मिसाइल खतरों से सुरक्षित करना है। इसके साथ ही भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी ड्रोन और लोइटरिंग मुनिशन की खरीद को भी हरी झंडी दी गई है। ये हथियार आधुनिक युद्ध में निगरानी, सटीक हमला और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को काफी मजबूत करेंगे।

इन रक्षा सौदों की एक खास बात यह है कि ज्यादातर प्रस्ताव ‘Buy (Indian-IDDM)’ श्रेणी के तहत स्वीकृत किए गए हैं। इसका मतलब है कि इन हथियार प्रणालियों का डिजाइन, विकास और निर्माण भारत में ही होगा। इससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के रक्षा विनिर्माण उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल के महीनों में DAC द्वारा स्वदेशी रक्षा खरीद के लिए लाखों करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

मंजूर की गई परियोजनाओं में आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, आधुनिक इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां और नौसेना के लिए माइन काउंटर मीज़र जैसे अहम उपकरण भी शामिल हैं। ये सभी प्रणालियां न केवल युद्ध के दौरान बल्कि शांति काल में भी सैन्य तैयारियों और लॉजिस्टिक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएंगी।

DAC के इन फैसलों का असर सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की उम्मीद है। स्वदेशी रक्षा कंपनियों और MSME सेक्टर को बड़े ऑर्डर मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसी वजह से शेयर बाजार में भी रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई है।

कुल मिलाकर, DAC की यह मंजूरी भारत को सैन्य रूप से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं पर जोर देकर सरकार न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत कर रही है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ा रही है।

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