वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक संकटों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे समय में देश की प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मुख्य रूप से घरेलू मांग पर टिका है, जो उसे बाहरी झटकों से काफी हद तक सुरक्षित रखता है।
क्रिसिल का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर लगभग 6.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। यह दर ऐसे समय में उल्लेखनीय मानी जा रही है, जब कई बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं मंदी या धीमी वृद्धि का सामना कर रही हैं। एजेंसी का कहना है कि घरेलू खपत में मजबूती, ग्रामीण मांग में सुधार और अच्छे मानसून की संभावना आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी राहत भरी तस्वीर पेश की गई है। क्रिसिल के अनुसार, खुदरा महंगाई दर में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी। महंगाई के नियंत्रण में रहने से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश मिल सकती है, जो निवेश और उपभोग दोनों के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
हालांकि, क्रिसिल ने कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापार शुल्क, विकसित देशों में कमजोर मांग और भू-राजनीतिक तनाव भारत के निर्यात और निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का असर भी भारतीय बाजारों पर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
इसके बावजूद, रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे में निवेश और नीतिगत समर्थन के चलते भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक संकटों के बीच भी संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। क्रिसिल का मानना है कि यदि वैश्विक हालात और अधिक नहीं बिगड़ते, तो भारत आने वाले समय में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।













