जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में निर्माणाधीन रतले जल विद्युत परियोजना को लेकर सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा कराए गए सत्यापन में यह खुलासा हुआ है कि परियोजना में काम कर रहे कुल 29 श्रमिकों में से पांच के आतंकियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क पाए गए हैं। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, इन पांच श्रमिकों के पारिवारिक सदस्य या तो सक्रिय आतंकवादी रह चुके हैं, सरेंडर कर चुके उग्रवादी हैं या फिर ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसके अलावा, शेष कई श्रमिकों के खिलाफ भी आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े मामले सामने आए हैं, जिससे परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
पुलिस ने इस संबंध में निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर सतर्क किया है और श्रमिकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रतले जैसी संवेदनशील और रणनीतिक परियोजना में संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। चिनाब नदी पर बन रही इस लगभग 850 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना को जम्मू-कश्मीर के बिजली ढांचे के लिए बेहद अहम माना जाता है, ऐसे में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक गंभीर परिणाम ला सकती है।
इस खुलासे के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। परियोजना से जुड़ी कंपनी ने पुलिस को आश्वासन दिया है कि वह सत्यापन रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देगी। वहीं, स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, रतले बिजली परियोजना से जुड़ी यह सत्यापन रिपोर्ट न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि भविष्य में इस तरह की रणनीतिक परियोजनाओं में कड़े बैकग्राउंड चेक की जरूरत पर भी जोर देती है।













