निर्यात बढ़ा, आयात घटा: भारत का व्यापार घाटा पांच महीने के निचले स्तर पर

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नवंबर 2025 में भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय और अन्य आर्थिक स्रोतों के मुताबिक, इस महीने भारत का निर्यात 19.37 प्रतिशत बढ़कर 38.13 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि पिछले कुछ महीनों के मुकाबले काफी मजबूत रही और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, यूरोप और अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग में तेजी ने इस निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वहीं, आयात में कमी के चलते भारत का व्यापार घाटा भी संकुचित होकर लगभग 24.53 अरब डॉलर पर आ गया। यह घाटा अक्टूबर के उच्च स्तर, जो 41.68 अरब डॉलर था, के मुकाबले काफी कम है और इसे पिछले पांच महीनों के निचले स्तर के रूप में देखा जा सकता है। आयात में गिरावट का मुख्य कारण महंगे वस्तुओं जैसे सोना, तेल और कोयले की खरीद में कमी रही। इससे भारत का कुल व्यापार संतुलन बेहतर हुआ और विदेशी मुद्रा पर भी दबाव कम हुआ।

निर्यात में वृद्धि के पीछे गहने और रत्न (जेम्स एंड ज्वेलरी) का मजबूत प्रदर्शन, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों का लगातार निर्यात शामिल है। इन प्रमुख क्षेत्रों ने मिलकर कुल निर्यात आंकड़ों को ऊपर उठाने में मदद की। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग और नए व्यापार समझौतों के प्रयासों से निर्यात को और बल मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, नवंबर 2025 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुधार की दिशा में है। निर्यात में बढ़ोतरी और व्यापार घाटे में संकुचन अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं और यह दिखाता है कि भारत वैश्विक व्यापार संतुलन को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में सक्षम हो रहा है।

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