केंद्र सरकार ने राज्यों से अपील की है कि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों को भेजते समय महिला तथा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थानों में इन वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा गया है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारी योजना (Central Staffing Scheme) के तहत नियुक्तियों को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।
केंद्र सरकार ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि यह प्राथमिकता नीति केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य केंद्रीय संस्थानों में प्रतिनियुक्ति से जुड़े पदों पर लागू होगी। इसमें मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) जैसे संवेदनशील पद भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि राज्यों को पर्याप्त संख्या में योग्य महिला और SC/ST अधिकारियों के नाम भेजने चाहिए, ताकि चयन प्रक्रिया में संतुलन और विविधता बनी रहे।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन अधिकारियों के नाम प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्तावित किए जाएं, उनकी सतर्कता से जुड़ी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच, शिकायत या अनुशासनात्मक प्रक्रिया लंबित है, तो उसका पूरा विवरण नाम के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाए। इसके साथ ही राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि केवल उन्हीं अधिकारियों के नाम भेजे जाएं, जिनकी प्रतिनियुक्ति अवधि के दौरान मूल कैडर में शीघ्र पदोन्नति या वापसी की संभावना न हो।
सरकार के इस कदम को केंद्र स्तर पर प्रशासनिक ढांचे में समावेशिता और समान अवसर को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला और SC/ST अधिकारियों की बढ़ी हुई भागीदारी से नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में व्यापक दृष्टिकोण विकसित होगा। इससे न केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा, बल्कि शासन व्यवस्था में विविध अनुभवों और विचारों को भी स्थान मिलेगा।
केंद्र सरकार ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे इस दिशा-निर्देश का गंभीरता से पालन करते हुए योग्य और अनुभवी अधिकारियों के नाम शीघ्रता से भेजें, ताकि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़े रिक्त पदों को समय पर और संतुलित तरीके से भरा जा सके। यह पहल उस व्यापक सरकारी प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक सेवाओं में विविधता, पारदर्शिता और समावेशी विकास को मजबूती देना है।













